माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। बीमा कंपनी ट्रक को ओवरलोड बताकर क्लेम नहीं रोक सकती क्योंकि सड़क हादसे से पहले सरकार ने वजन की क्षमता 25 मीट्रिक टन तक बढ़ा दी थी। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अर्जी स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 88,500 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। साथ ही, पांच हजार रुपये सेवा में कमी तो पांच हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर ट्रक मालिक को देने होंगे।
आयोग के रिकाॅर्ड के अनुसार, बहु अकबरपुर निवासी अजीत ने 2020 में आयोग में याचिका दायर की थी। उसने ट्रक का 2018 में 14.70 लाख रुपये का बीमा एक साल के लिए कराया था। जनवरी 2019 में ट्रक पलवल जिले में नूह-होडल रोड पर जा रहा था। विपरीत दिशा से आ रहा एक ओवरलोड ट्रक का चालक नियंत्रण खो बैठा और उसके ट्रक की लेन में आ गया।
खुद को बचाने के लिए शिकायतकर्ता के ट्रक का चालक भी नियंत्रण खो बैठा। साथ ही, विपरीत दिशा से आ रहे ट्रक से टकरा गया। उसने ट्रक की मरम्मत कराई, जिस पर 3 लाख रुपये खर्च हुए। सूचना के बावजूद बीमा कंपनी ने दावा स्वीकार नहीं किया।
आखिर में ट्रक मालिक ने आयोग में याचिका दायर कर 3 लाख रुपये ब्याज सहित, 11 हजार रुपये कानूनी खर्च व 50 हजार रुपये सेवा में कमी के मांगे। आयोग ने बीमा कंपनी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा। बीमा कंपनी ने कहा कि बीमा पॉलिसी के तहत ट्रक में हादसे के समय 21,200 किलोग्राम वजन होना चाहिए था लेकिन वजन 24,800 किलोग्राम था।
इस तरह 17 प्रतिशत अधिक वजन ट्रक में डाला गया। इस तरह बीमा पॉलिसी के नियमों का पालन नहीं किया गया। जवाब में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सरकार ने वजन की क्षमता 31 हजार किग्रा से 35 हजार किग्रा बढ़ा दी थी। सरकार की अधिसूचना के तहत उसका ट्रक 25 हजार हजार भार ले सकता था।
आयोग ने अर्जी स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को सर्वे के तहत तय की गई राशि साढ़े 88 हजार रुपये ब्याज सहित, कानूनी खर्च व सेवाओं में कमी पर तय राशि देने के आदेश दिए हैं।