। अतिरिक्त एवं जिला सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सिंह की कोर्ट ने जानलेवा हमले करने के मामले में करौंथा गांव के तीन युवकों को बरी कर दिया है क्योंकि केस में गवाही एवं शिकायतकर्ता मोहित ने आरोपी ललित, दीपक व नीरज को पहचानने से इन्कार कर दिया था।
मार्च 2020 में करौंथा गांव के बस अड्डे पर झगड़ा हुआ था। इसमें अड्डे पर चाय विक्रेता मोहित चाकू लगने से घायल हो गया था। शिवाज कॉलोनी थाना पुलिस को दिए बयान में मोहित ने आरोप लगाया था कि उसका गांव के युवक ललित, मोनू व नीरज के साथ झगड़ा हुआ था।
ग्रामीणों ने मामला शांत करवा दिया था। उसके बाद करीब सात बजे तीनों आरोपी दुकान पर अए और पीटना शुरू कर दिया। विरोध करने पर ललित और नीरज ने उसे पकड़ लिया और मोनू ने बर्फ तोड़ने वाले सूए से हमला कर दिया। शोर सुनकर चचेरा भाई अमित आया तो आरोपी धमकी देकर भाग गए।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर जानलेवा हमने की धारा 307 जोड़ दी थी। तभी से मामला अदालत में चल रहा था।
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अदालत में गवाही से पलटा शिकायतकर्ता, बोला-पुलिस ने कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाया
केस में गवाही के दौरान शिकायतकर्ता मोहित ने कहा कुछ अज्ञात लड़के उनकी दुकान पर आए और उसे पीटने शुरू कर दिया। उनमें से एक ने उसे चाकू मार दिया। शोर मचाया तो वहां लोग इकट्ठा हो गए। हमलावर उसे जान से मारने की धमकी भाग गए। उसने आगे गवाही दी कि उसने न्यायालय में उपस्थित अभियुक्तों को देखा है। ये वे व्यक्ति नहीं हैं जिन्होंने उसे चोट पहुंचाई। साथ ही बोले कि पुलिस ने कोरे कागजों पर उसके हस्ताक्षर करवा लिए। गवाहों ने कहा उनको भी कुछ पता नहीं। कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में तीनों आरोपियों को बरी कर दिया।