संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। सर्दियों के बढ़ते ही जिले में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। ठंड के मौसम में हृदय, सांस और वायरल संक्रमण के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश जैसी आम परेशानियों के साथ गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
पीजीआई में हार्ट, लकवा, सांस की समस्या और निमोनिया के केस दोगुने हो गए हैं। रोजाना ओपीडी में करीब 600 मरीज इन समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं जिनमें लगभग 150 मरीज सांस और हृदय की बीमारी से पीड़ित हैं।
पीजीआई विशेषज्ञ डॉ. संदीप गोयल ने बताया कि सर्दियों में तापमान कम होने से इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। हवा में नमी कम होने के कारण वायरल संक्रमण तेजी से फैलता है। लोग इस मौसम में अधिकतर घरों के अंदर रहते हैं जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। वहीं बढ़ता प्रदूषण और स्मॉग भी सांस संबंधी बीमारियों को गंभीर बना रहा है।
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ठंड के कारण नसें सिकुड़ जाती हैं : डॉ. संदीप
पीजीआई के डॉ. संदीप गोयल ने बताया कि सर्दियों में हार्ट अटैक और लकवे के मामलों में इजाफा होता है। ठंड के कारण नसें सिकुड़ जाती हैं और रक्त गाढ़ा होने लगता है जिससे रक्त संचरण प्रभावित होता है। बुजुर्ग मरीज सुबह करीब 4 बजे हार्ट की समस्या लेकर अधिक पहुंच रहे हैं। इस उम्र वर्ग के लोग ठंड में अचानक बिना पूरे कपड़े पहने उठ जाते हैं जिससे जोखिम बढ़ जाता है। रक्तवाहिकाओं में संचरण प्रभावित होने से लकवे के मामले भी सामने आ रहे हैं।
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ये हैं लक्षण
छाती से आवाज आना, सांस लेने में दिक्कत, बलगम और सांस चढ़ना निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं। आंख, कान और गले में होने वाले वायरल संक्रमण को अपर रेस्परेटरी समस्या कहा जाता है जबकि फेफड़ों तक संक्रमण पहुंचने पर लोअर रेस्परेटरी समस्या होती है। निमोनिया भी लोअर रेसपरेटरी समस्या है। कम तापमान में वायरस लंबे समय तक हवा और सतहों पर टिके रहते हैं जिससे संक्रमण तेजी से फैलता है।
जोड़ों में दर्द और डिहाइड्रेशन
सर्दियों में रक्त संचार धीमा हो जाने से जोड़ों का लचीलापन कम हो जाता है और पुराने दर्द की समस्या उभर आती है। ठंड में प्यास कम लगती है लेकिन शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है।
ये बरतें सावधानी
पूरे कपड़े पहनें, बुजुर्ग और बच्चे दिन में दो घंटे धूप लें, फेफड़ों के मरीज चेस्ट फिजियोथेरेपी कराएं, हाई फाइबर डाइट लें, हार्ट व सांस के मरीज मास्क पहनकर बाहर निकलें और रात में अंगीठी की जगह ऑयल हीटर का उपयोग करें।