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महिला सुरक्षा - दोषियों को सजा ए मौत मिले

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हैदराबाद में महिला चिकित्सक की रेप के बाद हत्या को लेकर मंगलवार को ओमेक्स सिटी में अमर उजाला के
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दिल्ली के निर्भया केस के बाद भी बेटियों के उत्पीड़न का सिलसिला है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा। देश में आए दिन बेटियां दुष्कर्मियों का शिकार बन कर दम तोड़ रही हैं। ऐसी घटना सामने आने पर लोग मोमबत्ती हाथ में लेकर एक दिन सड़क पर आते हैं फिर सब भूल जाते हैं। दुष्कर्म की घटनाओं का समाधान कैंडल जलाना नहीं है, हमें भी आगे आना होगा। महिला सुरक्षा को लेकर अब सिर्फ बातें नहीं, इस तस्वीर को बदला जरूरी है। सरकार व पुलिस प्रशासन को कड़ा नियम बनाते हुए सख्ती बरतनी होगी। अदालतें ऐसे मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई पर लेकर जल्द फैसला दें। दोषियों को बीच चौराहे पर सजा ए मौत दी जानी चाहिए, ताकि दूसरों को सबक मिले। मंगलवार को ओमेक्स सिटी पार्क में अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने कुछ यूं अपना गुस्सा और दिल का दर्द जाहिर किया।
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निर्भया सरीखी घटनाएं अंदर तक झकझोर जाती हैं। ये समाज व मानव जाति के लिए खतरनाक है। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। सरकार व प्रशासन ही नहीं, हमें भी आगे बढ़ कर आरोपियों को सजा दिलाने में सहयोग करना होगा। मां सख्त बनें, बेटी की तरह बेटे पर भी नियम सख्ती से लागू करें, ताकि किसी की बेटी सुरक्षित रह सके।
- मनीषा छाबड़ा, गृहिणी
भारत के कानून को दुष्कर्म जैसे मामलों में सख्त होने की जरूरत है। हम इतने संवेदनहीन नहीं हो सकते। क्यों और कैसे, यह समझना जरूरी है। इसे कैसे रोका जाए, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। दुष्कर्म करने वाले आरोपियों को जनता के बीच में ऑन द स्पॉट गोली से मार देनी चाहिए। महिलाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए जाने चाहिए, जिससे वह किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार रह सकें। बेटियों की सुरक्षा के बेहतर प्रबंध करें। दोषियों को सख्त सजा दे।
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- उषा कौशिक
हमें अपनी सोच बदलनी होगी, तभी देश आगे बढ़ेगा। अब और कोई निर्भया न बनें, इसके लिए सख्त से सख्त कदम उठाना होगा। दुष्कर्म के आरोपियों को जनता के सामने सजा मिलनी चाहिए, ताकि दूसरों को भी सबक मिले और ऐसी विकृत मानसिकता के लोग दुष्कर्म जैसा कदम उठाने से पहले एक हजार बार सोचे। इन लोगाें को चेहरा छुपाकर नहीं लोगों के बीच में सजा देनी चाहिए। घर से बाहर निकलते हुए डर लगने लगा है, अब तो रोहतक भी सेफ नहीं लगता।
- सारिका, छात्रा
हमारी और बेटियां निर्भया न बनें, इसके लिए बच्चों को शिक्षित बनाएं। शिक्षा के साथ उन्हें संस्कार दें। बेटियों को ही नहीं बेटों को भी समझाएं, वे महिलाओं का सम्मान करें। घर के बाहर अनपढ़ लोगों को भी समझाने व शिक्षित बनाने की जरूरत है। समाज में सभी को बराबरी का दर्जा है। लड़के व लड़कियां दोनों बराबर हैं। इनमें भेदभाव न किया जाए। दुष्कर्म पीड़िता की एक बार नहीं बार-बार मौत होती है इसलिए आरोपियों को भी बार-बार मौत देनी चाहिए।
- मोनिका, गृहिणी
बच्चों को उत्पीड़न से बचाने के लिए गुड टच, बैड टच के साथ सेल्फ डिफेंस जरूर सिखाएं। सुरक्षा की दृष्टि बेटियों को इतना समक्ष जरूर बनाएं। सरकार बेहतर व्यवस्था बना कर ऐसी घटनाओं पर रोक लगाए। इंडिया में भी अरब कंट्रीज जैसा कानून होना चाहिए। आरोप साबित होने के बाद भी न जाने यहां किस चीज का इंतजार करते हैं। अदालत न्याय में देरी न करके समय पर उचित न्याय करे। दुष्कर्म अमानवीय कृत्य है। ऐसी सोच रखने वालों को मानवीय सुविधाएं भी न दी जाएं।
- डॉ. सुमन
लड़कियों में लड़कों के मुकाबले आत्म विश्वास कम होता है। उन्हें शुरू से ही ऐसी मानसिकता के साथ पाला जाता है। उनके साथ भेदभाव होता है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। फैसला लेने में लड़कों को आगे रखा जाता है। लड़कियों को भी यह अधिकार मिलना चाहिए। उन्हें गुड टच-बैड टच सिखा कर उत्पीड़न के प्रति सचेत बनाने की जरूरत है। आरोपियों को बीच चौराहे पर खड़ा करके सजा ए मौत सुनानी चाहिए।
- मीनू सचदेवा, गृहिणी
हैदराबाद में महिला चिकित्सक के साथ हुई घटना ने अंदर तक झकझोर दिया है। इस मामले में आरोपी सामने हैं। सरकार व्हीक्ल एक्ट में इतने सख्त कानून बनाती है, लेकिन दुष्कर्म जैसे जुर्म के खिलाफ फैसला लेने में इतनी देरी क्यों? फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलाया जाए। ऐसे लोगों को आगे मौका नहीं दिया जाना चाहिए। सरकार इस बारे में सख्त फैसला ले।
- शशि शर्मा, गृहिणी
पुलिस सीमित है, कानून अंधा है। सरकार भी कर्मचारियों के भरोसे है। ऐसे में अकेले बदलाव संभव नहीं है। समाज के लोग मिलकर कर ही इस ओर कुछ कर सकते हैं। कानूनी प्रक्रिया काफी स्लो है, वरना ऐसे संवेदनशील मामलों में आरोपियों का पता चलने के बाद कोई मुकदमा चलाने की जरूरत ही नहीं रहती। हमें खुद आगे आना होगा और डरने के बजाय दूसरों की मदद करनी होगी।
- राजबाला सांगवान
निर्भया कांड या उस जैसे दूसरे मामलों में जनता को सख्त कदम उठाने चाहिए। दोषियों को वही प्रताड़ना देनी चाहिए, जो उन्होंने किसी की बेटी को दी। उसी तरह उसे तड़पाया जाए। नियम व कानून हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू हों। किसी की बेटी को मारने वाले को भी सरेआम मार दिया जाए, तभी अपराधियों में खौफ पैदा होगा।
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- अंजू अत्री, गृहिणी
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