रोहतक। सोनीपत से शनिवार दोपहर करीब 2 बजे गंभीर हालत में रेफर होकर पीजीआई पहुंची एक साल की प्रियंसिता यहां करीब आठ घंटे जिंदगी के लिए जूझती रही। यहां रात करीब 10 बजे उसने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि बच्ची की गंभीर हालत के चलते वेंटिलेटर की जरूरत थी। पीजीआई में वेंटिलेटर खाली नहीं मिला। इधर, पीजीआई प्रशासन ने बच्ची का जीवन बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने का दावा किया है।
परिजनों का आरोप है कि बच्ची नहाते समय बाथ टब में डूब गई थी। उसे परिजन गंभीरता हालत में सोनीपत अस्पताल ले गए। यहां से चिकित्सक ने उसे पीजीआई रेफर कर दिया। बच्ची को वेंटिलेटर की जरूरत थी। इस बारे में परिजनों ने चिकित्सकों से आग्रह भी किया, वेंटिलेटर नहीं मिला।
छात्र युवा संघर्ष समिति के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दीपक धनखड़ ने भी पीजीआई की व्यवस्था को लेकर संवेदनहीनता व गैरजिम्मेदार होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पीजीआई में बच्ची वेंटिलेटर का इंतजार करती रही, मगर यह सुविधा नहीं मिल पाई।
पीजीआई में 100 से ज्यादा वेंटिलेटर
पीजीआई में 100 से ज्यादा वेंटिलेटर हैं। सभी विभागों में उनकी बेड संख्या व क्षमता अनुसार वेंटिलेटर दिए गए हैं। ये सभी चालू हालत में हैं। कोरोना के समय नए वेंटिलेटर आए थे। इससे पूर्व आपातकालीन विभाग के आईसीयू में केवल आठ वेंटिलेटर थे। अब ट्रॉमा सेंटर के वार्ड में हर बेड पर वेंटिलेटर की सुविधा है।
पिता बोले- बेटी का आधा शरीर टब के बाहर व आधा अंदर था
मूलरूप से मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के ओटापुर्वा गांव हाल सोनीपत के गांव रायपुर के रहने वाले पवन का कहना है कि वह राजमिस्त्री है। उनकी दो बेटियां थीं। बड़ी ढाई साल तो छोटी एक साल की। नहाते समय वह कैसे टब में गिरी, पता नहीं। बेटी का आधा शरीर टब के बाहर था व आधा अंदर।
सोनीपत से गंभीर हालत में संस्थान लाई गई बच्ची का इलाज किया गया है। उसकी हालत नाजुक थी व बचने की संभावना नहीं थी। विभाग में वेंटिलेटर खाली नहीं था, इसलिए वेंटिलेटर नहीं मिल पाया। बच्ची के लिए हर संभव प्रयास किया गया है।
- डाॅ. कुंदन मित्तल, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआई।
31सीटीके51...पीजीआई में उपचाराधीन सोनीपत से आई एक साल की बच्ची। स्रोत: पाठक