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Rohtak News: दो साल गेस्ट फैकल्टी रही सुमन के खिलाफ एमडीयू ने ही लिखाई थी एफआईआर

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रोहतक। जाली पीएचडी से एमडीयू के शारीरिक शिक्षा विभाग में गेस्ट फैकल्टी रहने पर तीन साल की सजा पाई सुमन तंवर की एंट्री अगस्त 2014 में हुई थी। खेल खुला तो अगस्त 2016 में हटा दिया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. भगत सिंह राठी ने दिसंबर 2016 में इसकी एफआईआर लिखाई थी।
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केस दर्ज होने के करीब नौ साल बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट हिमांशु आर्य की अदालत ने धोखाधड़ी, कूटरचना और जाली दस्तावेज इस्तेमाल करने पर सुमन को तीन साल की सजा सुनाई। 5000 का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने कहा, अपराध की प्रकृति को देखते हुए नरमी बरतना गलत होगा। सुमन तंवर ने एमडीयू में शारीरिक शिक्षा विभाग में गेस्ट फैकल्टी बनने के लिए फर्जी पीएचडी डिग्री लगाई थी। उसने दावा किया था कि 2013 में कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से यह उपाधि हासिल की है। इसी आधार पर उसे अगस्त 2014 में नौकरी भी मिल गई।
इस बीच, राजकीय महाविद्यालय सांपला में प्राध्यापक डॉ. जयपाल ने एमडीयू में 6 फरवरी 2015 को आरटीआई लगाकर चयन संबंधी दस्तावेजों की जानकारी मांगी। यह मिलने पर 6 अक्तूबर 2015 को छत्रपति शाहू जी महाराज विवि कानपुर से सुमन की पीएचडी के बारे में सूचनाएं मांगीं।
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कानपुर यूनिवर्सिटी ने 28 मई 2016 को दिए जवाब में बताया कि 2010 से 2014 तक उनके यहां से किसी ने शारीरिक शिक्षा विभाग में पीएचडी नहीं की है। डॉ. जयपाल ने यह सूचनाएं एमडीयू के शारीरिक शिक्षा विभाग के तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. भगत सिंह राठी से साझा कीं।
इसके बाद दिसंबर 2016 में प्रो. राठी ने सुमन के खिलाफ एफआईआर लिखाई। नौ साल बाद उसे सजा सुनाई जा सकी। सुमन को फिलहाल फैसले के खिलाफ अपील दायर करने के लिए जमानत भी मिल गई है।
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