रोहतक। राजस्थान के चूरू जिले के गांव भानुदा के पूर्व सरपंच विजय पाल सिंह का फोन आने के बाद शहीद लोकेन्दर का परिवार उनको नमन करने के लिए लड़ाकू विमान जगुआर क्रैश होने वाली जगह पर गया था। यहां पर शहीद लोकेन्दर के भांजे अगस्त्य को उनकी नेम प्लेट मिली।
सोमवार को राजस्थान से लौटने के बाद देव कॉलोनी स्थित आवास पर हुई बातचीत में शहीद के पिता जोगेन्दर ने कहा कि गांव के पूर्व सरपंच विजय पाल सिंह ने विमान क्रैश में शहीद हुए दोनों पायलट के घर पर संपर्क कर उनको गांव में आने के लिए कहा था।
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इसके बाद विचार बने के बाद परिवार राजस्थान के भानुदा गांव पहुंचा। यहां से पूर्व सरपंच व अन्य ग्रामीण शहीद के परिवार को विमान गिरने की जगह ले गए। घटनास्थल पर दो घंटे तक शहीद के परिवार से ग्रामीणों ने मुलाकात की। उन्होंने कहा कि लोकेन्दर की शहादत पर पूरे गांव को गर्व है। उन्होंने अपना बलिदान देकर तीन गांवों के लोगों की जान बचाई। इसके बाद परिवार शहीद की नेम प्लेट लेकर लौटा।
रामगोपाल कॉलोनी निवासी जोगेंद्र सिंह के छोटे बेटे लोकेन्दर सिंह सिंधू वायुसेना में पायलट के पद पर तैनात थे। इनकी राजस्थान के सूरतगढ़ में पोस्टिंग थी। जगुआर लड़ाकू विमान से सह पायलट को ट्रेनिंग देते समय 9 जुलाई को विमान क्रैश हो गया था।