निगाना रोड़ पर सैकड़ों एकड़ में जलभराव कि स्थिति बनी हुई।
कलानौर। कलानौर क्षेत्र के गांवों में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या इस बार किसानों के लिए गंभीर संकट बन चुकी है। हालात ऐसे हैं कि खेतों में भरा पानी न तो निकल पा रहा है और न ही किसी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई दे रही है। नतीजा यह है कि किसान न केवल मौजूदा फसलों से वंचित हो रहे हैं बल्कि रबी और खरीफ दोनों सीजन की फसलों की बिजाई नहीं हो पाई है।
कलानौर, गुढ़ान, कटेसरा, निगाना सहित आसपास के गांवों में हजारों एकड़ भूमि लंबे समय से जलमग्न है। खेतों में लगातार पानी भरे रहने के कारण जमीन की उर्वरक क्षमता खत्म होती जा रही है और कई किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि चार माह से खेत से पानी सूखने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
प्रशासन की ओर से मानसून के दौरान जल निकासी के लिए अस्थायी इंतजाम किए जाने के दावे तो किए गए लेकिन जमीन पर वे पूरी तरह नाकाम साबित हुए। जहां निकासी की सबसे ज्यादा जरूरत है, वहां पंपिंग की व्यवस्था तो की गई लेकिन वर्तमान में कोई भी पंपसेट नहीं चल रहा है और न ही बिजली आपूर्ति चालू है।
सरकारी आंकड़ों में 150 बिजली मीटर कनेक्शन चालू,
बावजूद इसके बिजली निगम ने जल स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई विभाग व नगर पालिका के 170 अस्थायी तौर पर मीटर कनेक्शन किए थे। इसमें से सरकारी दावों में आज भी 150 बिजली मीटर कनेक्शन चालू हैं जो खेतों से जल निकासी कर रहे हैं।
किसानों की पीड़ा...जिम्मेदार विभागों ने सिर्फ औपचारिकताएं निभाईं
किसान अमित, जसवीर ओमप्रकाश, नरेश कुमार, दिनेश कुमार, आजाद, जोरा सिंह ने कहा कि जिम्मेदार विभागों ने सिर्फ औपचारिकताएं निभाईं जबकि असली समस्या को नजरअंदाज कर दिया गया। जलभराव के कारण किसान न समय पर बुवाई कर पा रहे हैं और न ही खेतों में खाद व बीज डालने की स्थिति बन पा रही है। किसानों का कहना है कि प्रशासन और सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। किसानों ने मांग की है कि जलभराव की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए ताकि खेतों में उनके सपने लहलहा सकें।