संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। सत्संग जप-तप-पूजा-पाठ से भी बड़ा होता है। बाकी तो केवल एक लोक सुधारती हैं लेकिन सत्संग आपके तीनों लोकों को सुधार कर चौथे लोक में ले जाता है। सत्संग आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है। सत्संग सत्पुरुष का संग है और संतों का संग पारस पत्थर से भी बढ़कर है। सत्संग तन-मन और धन से पवित्र कर सेवा दान और हरि का गुणगान सिखाता है।
यह वचन परम संत सतगुरु कंवर साहेब महाराज ने रोहतक के गोहना रोड स्थित राधास्वामी आश्रम में कहे। वार्षिक सत्संग और भंडारे में उमड़ी संगत को सत्संग देते हुए हुजूर कंवर साहेब ने कहा कि सत्य असत्य की लड़ाई में जीत हमेशा सत्य की ही होती है।
कंवर साहेब ने कहा कि वक्त कभी एक जैसा नहीं रहता वो बदलता रहता है। धैर्य मत छोड़ो, केवल सतगुरु के वचन पर रहो, कभी नहीं भटकोगे। गुरु महाराज ने कहा कि अगर मन के वश में रहे तो आप दुनियादारी के जाल से निकल नहीं पाओगे। मन आपको आपकी आदतों का गुलाम बनाता है। मन की गुलामी से संत सतगुरु ही निकालता है।
कलियुग में संत सतगुरु परमात्मा के रूप में देह धारे हुए हैं। जब काम, क्रोध, मद, मोह, अहंकार जैसे दुश्मन घेरा डालते हैं, तब इंसान सतगुरु को पुकार लगाता है और संत सतगुरु उसे इन दुश्मनों से बचाकर सत्संग में लगाता है। इंसान हो तो सबसे प्रेम करो। अपने घरों में प्यार प्रेम का वातावरण बनाओ। बच्चों को अच्छी और सनातनी शिक्षा दो। बड़े-बुजुर्गों की सेवा करो। दीन दुखी गरीब की मदद करो। अपनी नीयत को देने वाली बनाओ।
31...रोहतक के राधास्वामी आश्रम में सत्संग करते सतगुरु कंवर साहेब। स्रोत : आयोजक