झज्जर। पांच वर्ष की आयु में क्रिकेट की दहलीज पर अपना कदम रखने वाले यशवर्धन दलाल सुर्खियों में हैं। उन्होंने कर्नल सीके नायडू ट्राॅफी अंडर-23 में नाबाद 428 रन बनाकर इतिहास रच दिया। झज्जर के बर्फखाना रोड के रहने वाले यशवर्धन दलाल ने यह मुकाम हासिल करने के लिए काफी मेहनत की है। उनकी मेहनत के साथ ही उनके कोच नवीन सैनी का भी इसमें अहम योगदान है।
यशवर्धन ने जब क्रिकेट खेलना शुरू किया तो उनके पिता सलेंद्र दलाल की एक जूतों की दुकान थी। अब वे एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। वहीं, उनकी माता कमलेश दलाल गृहिणी हैं। यशवर्धन के खेलने की शुुरुआत पार्क से हुई। उसी दौरान कोच नवीन सैनी ने यशवर्धन को खेलते देखा। वह यशवर्धन के पुल शॉट से प्रभावित हुए और उनको क्रिकेट की ट्रेनिंग देने का मन बनाया। तभी पिता सलेंद्र दलाल ने भी बेटे को पांच वर्ष की आयु में कोच नवीन सैनी के पास ट्रेनिंग के लिए छोड़ दिया। यशवर्धन ने दूर होने के कारण स्कूल भी बदला। यशवर्धन क्रिकेट के उभरते सितारे बन गए हैं। वह आने वाले भारतीय क्रिकेट का भविष्य बन गए हैं।
शुरुआत में कोच नवीन सैनी उन्हें यह कहकर क्रिकेट खिलाते थे कि अगर वह अच्छे से खेलेगा तो उसको जहाज में बैठने का मौका मिलेगा। उसके बाद यशवर्धन मन लगाकर अभ्यास करता था। यशवर्धन का बचपन से ही जहाज में बैठने का सपना था। उनका यह सपना अंडर-14 हरियाणा के मैचों के दौरान पूरा हुआ।
यशवर्धन ने खेले हैं ये टूर्नामेंट
अब तक यशवर्धन दलाल दो बार अंडर-14 हरियाणा, दो बार अंडर-19 हरियाणा, तीन बार स्कूली नेशनल अंडर-14, दो बार कूच बिहार ट्रॉफी, दो बार वीनू मांकड़ ट्रॉफी में खेले हैं। माैजूदा समय में कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी अंडर-23 खेल रहे हैं।
देश के लिए खेलना है सपना
यशवर्धन दलाल ने कहा कि जब उनके नाम यह रिकॉर्ड दर्ज हुआ तो उन्हें बहुत खुशी हुई थी। टीम मैनेजमेंट और खिलाड़ियों की बदौलत ही यह स्कोर बन पाया। टीम की तरफ से जिस तरह के आदेश मिले, उनका पालन किया। अगला मैच 15 नवंबर को बिहार के साथ होगा। उस मैच में भी एक अच्छा स्कोर दर्ज करूंगा। देश के लिए खेलना मेरा सपना है।
विराट की टीम का हिस्सा बनना चाहते हैं यशवर्धन
यशवर्धन ने बताया कि उन्होंने पांच वर्ष की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था, लेकिन उन्होंने जब क्रिकेट का ज्ञान होने लगा जब वह 8-9 वर्ष के थे। उन्होंने विराट कोहली से प्रभावित होकर आगे का क्रिकेट खेलना जारी रखा। वह विराट कोहली की टीम का हिस्सा बनना चाहते हैं, जिससे उनको कोहली से कुछ सीखने को मिल सके।
स्कोर पता चलने पर मां हुई भावुक
यशवर्धन दलाल की माता कमलेश दलाल ने बताया कि वह बहुत खुशी महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा मेरा सपना है कि मेरा बेटा देश के लिए खेले और देश का नाम रोशन करे। उन्होंने इसका श्रेय कोच को दिया। यशवर्धन के नाम जब सीके नायडू ट्रॉफी में अब तक का सर्वाधिक स्कोर रिकॉर्ड दर्ज हुआ तो वह भावुक भी हो गई थीं।
कभी-कभी मैच देखते हैं पिता
यशवर्धन दलाल के पिता सलेंद्र दलाल ने कहा कि परिवार वालों की वजह से बेटा यहां तक पहुंचा है। कोच नवीन सैनी का इसमें अहम योगदान है। वह अपने बेटे का मैच कभी कभी देखते हैं ताकि यशवर्धन यह महसूस ना करे कि उनके पिता उन पर निगरानी रखते हैं और प्रदर्शन से न ध्यान भटके।
यशवर्धन को नीली जर्सी में देखना चाहते हैं कोच
यशवर्धन के कोच ने बताया कि उन्होंने मंगलवार को जैसे ही यशवर्धन को देखा तो वह भावुक हो गए। उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। कोच नवीन सैनी का सपना है कि यशवर्धन रणजी खेले और फिर उसकी जर्सी का रंग नीला हो।
यशवर्धन को बुलाते हैं टाबू
यशवर्धन दलाल को परिवार और ग्राउंड पर खिलाड़ी व कोच टाबू के नाम से बुलाते हैं। यशवर्धन को परिवार के सदस्य शुरू से ही टाबू के नाम से बुलाते हैं। अकेडमी में खेलने वाले खिलाड़ी भी उनको टाबू के नाम से बुलाने लगे। टाबू उनका निक नेम बन गया।