रोहतक । श्रीनगर कॉलोनी स्थित रामा आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस में सुदामा चरित्र का वर्णन किया गया। कथा व्यास स्वामी रामानुज दास महाराज ने बताया कि सुदामा का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति का आधार भौतिक साधन नहीं, बल्कि निर्मल मन और भगवान के प्रति अटूट विश्वास है। श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता संसार को यह संदेश देती है कि भगवान अपने भक्तों से केवल प्रेम की अपेक्षा करते हैं। निर्धन होते हुए भी सुदामा की भक्ति और समर्पण ने उन्हें लोक-लाज और मोह से परे भगवान का प्रिय बना दिया। कथा में आगे श्रीकृष्ण-बलराम की द्वारिका लीला, भक्त प्रहलाद चरित्र, विष्णु भक्त ध्रुव चरित्र जैसे प्रेरक प्रसंगों का वर्णन किया गया। महंत अशोक दास महाराज के आशीर्वचन ने भक्तों में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया। संवाद