रोहतक। पीजीआई में बुधवार को गुरु पर्व का अवकाश होने के बावजूद हलचल रही। संस्थान के चिकित्सकों के ग्रुप व सोशल मीडिया पर दिनभर दलित चिकित्सकों के उत्पीड़न का मामला छाया रहा। इस मामले में चिकित्सक जल्द ही नए सिरे से शिकायत देने की तैयारी कर रहे हैं।
यही नहीं, वीरवार को संस्थान खुलने पर मामले में जांच की कार्रवाई भी शुरू हो सकती है। बुधवार को चर्चा के साथ उत्पीड़न करने वाले चिकित्सक पर भी कई तरह के गंभीर आरोप लगाए गए। इसमें नियमों के विरुद्ध अधिकारी बनना मुख्य है।
चिकित्सकों ने एक पद पर रहते हुए दूसरा पद रखना व पद विशेष के लिए निर्धारित उम्र से अधिक आयु का होना खास रहा। संस्थान के अधिकारी भी नियमों को लेकर मौन हैं। वे न तो नियमों को सही ढंग से लागू कर रहे हैं और न ही व्यवस्था बना रहे हैं। नतीजतन चिकित्सकों में रोष पनप रहा है।
संस्थान के दलित चिकित्सकों में यह रोष आक्रोश बनने लगा है। इसकी वजह पिछले 15 वर्ष से संस्थान में अपनी सेवाएं दे रहे चिकित्सक डॉ. प्रियंका और डॉ. महिपाल को अपमानित करने व जातिसूचक शब्द कहना है।
उनका कहना है कि मरीजों की सेवा मंे तत्पर रहने वाले चिकित्सकों को मानसिक रूप से कष्ट झेलना पड़ रहा है। इस मामले में फिलहाल कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई है। वीरवार को संस्थान खुलने पर अधिकारी इस मामले में संज्ञान ले सकते हैं।