रोहतक। अगर आप भी पांच साल की कम उम्र के बच्चों को स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट देते हैं तो इससे परहेज बरतें। बच्चे इसकी लत लगने से वर्चुलर ऑटिज्म का शिकार हो रहे हैं। शहर के नागरिक अस्पताल में आए दिन ऐसे पांच से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। इस बीमारी का कारण अपनी व्यस्तता के चलते अक्सर माता-पिता का बच्चों को कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, मोबइल या किसी वीडियोगेम की स्क्रीन के सामने बैठा देना है। इससे बच्चा ऑटिज्म का शिकार बन सकता है।
मनोचिकित्सक विपिन नैन ने बताया कि ऑटिज्म दो प्रकार के होते हैं। वर्चुलर व क्लासिकल। क्लासिकल ऑटिज्म का शिकार वे बच्चे होते हैं, जिनके मां-बाप के रिश्ते ठीक न हों या फिर उनका गर्भ में सही विकास न हुआ हो। इसलिए क्लासिकल ऑटिज्म गर्भ से होता है। वर्चुलर ऑटिज्म बच्चों को ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के उपयोग से होता है। वर्चुलर ऑटिज्म एक साल के बच्चों में दिखना शुरू हो जाता है। बच्चा मानसिक रूप से थोड़ा कमजोर होता है। यह बीमारी होने पर मिर्गी की समस्या भी हो सकती है। कई मामले में बच्चों को बोलने और सुनने में भी परेशानी होती है। ऑटिज्म मामलों में बढ़ोतरी का बड़ा कारण माता-पिता का अपने काम में व्यस्त होना है। इसके चलते वे बच्चों को फोन या अन्य गैजेट दे देते हैं। बच्चा दिनभर गैजेट में उलझा रहता है। इससे बच्चे को फोन की लत लग जाती है। वह अपनी अलग दुनिया में चला जाता है। इसका समय पर इलाज न होने से बच्चे को बोलने में दिक्कत आने लगती है।
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ऑटिज्म के लक्षण
-बच्चा बात न करे और दूसरों से नजरें न मिलाए या ऐसा करते समय उसे घबराहट हो
-किसी को हमेशा तिरछी नजर से देखना।
-हमेशा अकेला रहना
-पंजे पर चलना
-किसी तरह का संकेत नही देना
-एक ही तरह का गेम खेलना