माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में बिना जांच पड़ताल 32 लाख रुपये के होम लोन की एंट्री करने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एचडीएफसी बैंक को 50 हजार रुपये हर्जाना भरने का आदेश दिया है। साथ ही, संपत्ति के रिकॉर्ड से लोन की एंट्री हटवाने की भी हिदायत दी है। इसके अलावा, 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर भी देने होंगे।
आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक, इस्माईला 9बीं, हाल में ऑफिसर कॉलोनी निवासी 47 वर्षीय राजेश देवी ने जनवरी 2023 में अर्जी दायर की थी कि उसने होम लोन लेने के लिए बैंक से संपर्क किया। बैंक ने 8 प्रतिशत ब्याज की दर पर 32 लाख रुपये मंजूर कर दिए। बैंक ने उनके गढ़ी बोहर स्थित 180 वर्ग गज के प्लाॅट के रिकाॅर्ड में बैंक लोन की एंट्री (म्यूटेशन) करवा दी।
इसके बाद लोन की राशि हासिल करने के लिए संपर्क किया तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आखिर में महिला ने आयोग में अर्जी दायर की 32 लाख रुपये के होम लोन की एंट्री हटवाने व मानसिक उत्पीड़न करने पर 5 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की।
आयोग के नोटिस पर बैंक ने कहा कि शिकायतकर्ता ने 40 लाख रुपये का लोन मांगा था। जांच के बाद 32 लाख का ऋण मंजूर किया गया। तय किया गया था ऋण कानूनी व तकनीकी मंजूरी के तहत दिया जाएगा। गिरवी रखी गई संपत्ति अनधिकृत क्षेत्र में आती है, इसलिए अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिल सका।
ऐसे में ऋण की राशि जारी नहीं की जा सकी। साथ ही, कहा कि यह शिकायतकर्ता की गलती से हुआ है। आयोग ने दोनों पक्षों की बहस के बाद निर्णय दिया है कि बैंक का पहला कार्य है कि वह गिरवी रखी गई संपत्ति के कानूनी व तकनीकी पहलुओं की जांच करे।
बिना जांच के ही 32 लाख रुपये का लोन मंजूर कर एंट्री राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड में करवा दी। इस तरह बैंक को सेवाओं में कमी के चलते 50 हजार रुपये हर्जाना भरना होगा। तत्काल प्रभाव से राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड से होम लोन की एंट्री हटवाई जाए।