रोहतक। लेबर चौक स्थित कुकारों वाली रामलीला कमेटी की ओर से अमावस्या के दिन रविवार को रामलीला का मंचन शुरू किया गया। पहले दिन श्रवण कुमार भक्ति व नारद मोह की लीला का मंचन किया गया।
रामलीला के पहले दृश्य में दिखाया गया कि पितृ भक्त श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को तीर्थाटन के लिए ले जाते हैं। रास्ते में प्यास लगने के कारण वह जल लेने जाते हैं। उसी समय राजा दशरथ भी शिकार के लिए गए होते हैं। श्रवण जब जलपात्र में जल भर रहे होते हैं तो दशरथ को लगता है कि कोई हिरण पानी पी रहा है। वे शब्द भेदी बाण चला देते हैं। इसके लगने से श्रवण की मृत्यु हो जाती है।
वहीं, दुखी होकर श्रवण के माता-पिता दशरथ को पुत्र वियोग में मरने का श्राप देते हैं। श्रवण को बाण लगने से पंडाल में मौजूद जनता की आंखें भर आती हैं। इसके बाद रामलीला का अगला दृश्य भगवान नारद तपस्या में लीन होता है और कामदेव उनकी तपस्या को भंग करने की कोशिश करते है। लेकिन, नारद की तपस्या भंग नहीं कर पाते। नारद का अभिमान दूर करने के लिए भगवान विष्णु अपनी माया रचते हैं और माया से नारद का अभिमान दूर करते हैं।