रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर डिसेबिलिटी स्टडीज विभाग में पिछले एक माह से चल रहा प्रशासनिक गतिरोध वीरवार को समाप्त हुआ। साइन लैंग्वेज की समझ नहीं रखने वाले अस्थाई कर्मचारी को प्रशासन ने बदल दिया है।
बुधवार को हुए विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन की ओर से की गई नियुक्ति में आई तकनीकी खामियों को कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने वीरवार को त्वरित संज्ञान लेते हुए दूर कर दिया। एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स (एएसएपी) के प्रदेश अध्यक्ष दीपक धनखड़ ने कहा कि प्रशासन ने एक अस्थाई लिपिक की नियुक्ति की थी।
उस कर्मचारी को न तो प्रशासनिक अनुभव था और न ही विशेष शिक्षा (स्पेशल एजुकेशन) में अनिवार्य साइन लैंग्वेज की समझ थी। इस कारण मूक-बधिर विद्यार्थियों और विभाग के कार्यों में बाधा आ रही थी। इसी गंभीर विषय को लेकर विद्यार्थियों और अध्यापकों का प्रतिनिधिमंडल कुलसचिव से मिला।
कुलसचिव ने विद्यार्थियों की पीड़ा व विभाग की आवश्यकताओं को समझा। इसके चलते वहां अनुभवी लिपिक की नियुक्ति सुनिश्चित की गई। इस मौके पर रजनी, अनुजा, स्वाति, रूपेश, मनीषा रानी, नवीन सांगवान, हिमानी, नीधि, सुरजीत, मुस्कान समेत अनेक विद्यार्थी मौजूद रहे।