झज्जर। शहर के 7 पार्कों की देखरेख का टेंडर पिछले 16 से खत्म हो चुका है। चुनाव आचार संहिता के चलते नया टेंडर नहीं दिया जा सकता ऐेसे में इन पार्कों की देखरेख रामभरोसे हो गई है हालांकि इनका टेंडर आगे बढ़वाने का भरोसा देकर काम कराया जा रहा है लेकिन यदि टेंडर जल्द आगे नहीं बढ़ा तो समस्या हो सकती है। नगर परिषद की तरफ से आचार संहिता हटने तक पुराने टेंडर की अवधि बढ़ाने को लेकर जिला नगर आयुक्त को पत्र लिखा है।
शहर में कुल 7 पार्क हैं। जिनकी देखरेख, साफ-सफाई का जिम्मा तीन अलग-अलग एनजीओ के पास हैं। एक एनजीओ के पास चार, एक के पास दो और एक के पास एक पार्क की जिम्मेदारी है। इनका काम पार्क की साफ-सफाई रखना, घास पेड़-पौधों की छंटाई, माली रखना होता है। इस टेंडर की अवधि 31 मार्च को खत्म हो चुकी है और अब इसे खत्म हुए 16 दिन बीत चुके हैं, फिलहाल एनजीओ को आगे टेंडर बढ़ने की कहकर काम कराया जा रहा है। यदि अवधि नहीं बढ़ती है तो पार्कों के रखरखाव को लेकर दिक्कत आ सकती है।
शहर के अधीन हैं 7 पार्क
नगर परिषद के अधीन झज्जर शहर में 7 पार्क हैं। इनमें सबसे बड़ा झज्जर-बहादुरगढ़ रोड पर शहीदी पार्क है। इसके अलावा मातूराम पार्क, ब्रह्मचारी सुभाष आर्य पार्क, महाराजा अग्रसेन स्वर्ण जयंती पार्क, टाउन पार्क, राव मंगली राम पार्क और रेवाड़ी रोड स्थित बल्लू वाली कुई पार्क शामिल है।
पार्क में झूलों की हालत खराब
शहर के पार्कों में लगे झूलों की हालत खराब है। कई पार्कों में झूले टूट भी चुके हैं । मातूराम पार्क में सभी झूले टूटे हुए हैं। यह पार्क 2014 में बनाया गया था। अब यहां लगा एक भी झूला ठीक नहीं है। इसी प्रकार से टाउन पार्क में भी कई झूलों की हालत ठीक नहीं है और वह टूट चुके हैं। कुछ झूले कुछ समय पहले लगे थे, उनकी हालत फिलहाल ठीक है।
15 लाख रुपये का बजट पास
नगर परिषद ने शहर के पार्कों के विकास के लिए 15 लाख रुपये का बजट पास किया हुआ है। इसके तहत पार्कों में झूले लगाए जाने हैं, लेकिन कई माह बीतने के बाद भी अब तक यह काम शुरू नहीं हो पाया है। नगर परिषद ने इनके टेंडर भी लगाए थे।
वर्जन
पार्काें के रखरखाव का टेंडर खत्म हो चुका है। यह 7 तीन एनजीओ के पास हैं। फिलहाल वह काम कर रही हैं। टेंडर को चुनाव के लिए नया नहीं लगाया जा सकता, इसलिए आगे बढ़ाने के लिए जिला नगर आयुक्त से अनुमति मांगी गई है।
मनदीप सिंह, एमई, नगर परिषद, झज्जर