रोहतक। तकनीक (टेक्नोलॉजी) और नवाचार (इनोवेशन) आर्थिक प्रगति का आधार है। वर्तमान भारत के विकसित भारत बनने के लक्ष्य के लिए उद्यमिता, हरित अर्थव्यवस्था (ग्रीन इकोनॉमी) और सामाजिक नवाचार (सोशल इनोवेशन) की भूमिका रहेगी। संबलपुर विश्वविद्यालय, ओडिशा के पूर्व कुलपति प्रो. संजीव मित्तल ने तकनीकी नवाचार (टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन) में सक्रिय रूप से जुड़ने व सोशल इंपैक्ट स्टार्टअप को चुनने का आह्वान किया। वह शुक्रवार को महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के प्रबंधन अध्ययन और शोध संस्थान की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ट्रेंड्स 2024 में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
मित्तल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी समेत अन्य नवीनतम प्रौद्योगिकी के प्रबंधन में इस्तेमाल की वकालत की। उन्होंने कहा कि सामाजिक सरोकार उन्मुख नवाचार तथा उद्यमिता के जरिए सामाजिक तथा आर्थिक भेदभाव को दूर किया जा सकता है। उन्होंने रिसर्च एंड डेवलपमेंट के महत्व पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे उद्यमी राजेश जैन ने कहा कि उचित प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर उद्योग जगत में गुणवत्ता नियंत्रण व उत्पाद का गुणवत्ता प्रबंधन किया जा सकता है। पर्यावरणीय चुनौतियों के दृष्टिगत वेस्ट मैनेजमेंट, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, ग्रीन एनर्जी यूज, प्लास्टिक फ्री इनवायरमेंट आदि पर भी फोकस जरूरी है।
इमसॉर निदेशक प्रो. सत्यवान बरोदा ने कहा कि संगोष्ठी के जरिए संपोषणीय प्रबंधन कर संदेश बुलंद किया जाएगा। इस दौरान संगोष्ठी की संयोजक प्रो. दिव्या मल्हान, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रणदीप राणा, सचिव डाॅ. सौरभ कांत, डाॅ. आरती चहल, प्रो. सुमित गिल, प्रो. विनीता, प्रदीप अहलावत, प्रो. ऋषि, सुनित मुखर्जी, डाॅ. राजकुमार आदि उपस्थित रहे।