रोहतक। भारतीय महिलाएं वैदिक काल से ही पर्यावरण संरक्षण की पक्षधर रही हैं। हर भारतीय घर में तुलसी, बेल पत्थर, केले का पौधा होना और उनका पूजन हमारी पर्यावरण संरक्षण की भावना को दर्शाता है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना पर्यावरण का संरक्षण नहीं किया जा सकता है। यह उद्गार महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी आउटरीच प्रोग्राम के समन्वयक और बॉटनी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. सुरेंद्र यादव ने दिया। वे शुक्रवार को एमडीयू के गोद लिए गांव भाली आनंदपुर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम में बोल रहे थे।
यूनिवर्सिटी आउटरीच प्रोग्राम के तत्वावधान में आयोजित पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं के योगदान को अहम बताया। उन्होंने कहा कि वन और पर्यावरण संरक्षण के मामलों में भारतीय महिलाएं पुरुषों से आगे रही हैं। उन्होंने खेजड़ली आंदोलन, साइलेंट वैली आंदोलन, चिपको आंदोलन व नर्मदा बचाओ आंदोलन में महिलाओं की अग्रणी भूमिका पर प्रकाश डाला। मंच संचालन पूनम और निर्मला ने किया। एमडीयू शोधार्थी प्रीतम हसनपुरी ने संचालन सहयोग दिया। निर्मला ने आभार जताया। इस मौके पर पूनम, संतोष, प्रोमिला, सरोज, रजनी, सुमन ने भी अपने विचार व्यक्त किए।