क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज के वक्त में किसी गांव में कोई मुकदमा दर्ज न हुआ होगा। जी हां, रोहतक जिले में एक या दो गांव नहीं, बल्कि आठ गांव ऐसे हैं। जहां पिछले पांच वर्षों से भी ज्यादा समय से कोई मामला थाने की दहलीज तक नहीं पहुंचा है। विवाद होता भी है तो यहां के लोग मिल बैठकर सुलझा लेते हैं। इन आठ गांवों में तीन गांव कलानौर कस्बे के हैं। एक गांव बेड़वा महम थाना क्षेत्र के अंतर्गत है। साल 2020 में जिलाभर के सभी 15 थानों में 7250 मुकदमे दर्ज हुए हैं। जबकि साल 2019 में यह आंकड़ा 7170 का था। इन गांवों में कोई विवाद पंजीकृत नहीं हुआ। नए साल पर ये गांव औरों के लिए सुकून देने वाले प्रेरणास्रोत बन गए हैं।
आइए जानते हैं इन गांवों के बारे में-
कलानौर कस्बे में अंतर्गत आने वाला गांव तैमूरपुर है। यहां के मौजूदा सरपंच विनोद बताते हैं कि पंच ही परमेश्वर होता है, कि पंक्ति बहुत बार सुनी थी। इसी को सच साबित करने के लिए पिछले सरपंचों के प्रयासों को और आगे बढ़ाया। जिसके परिणाम स्वरूप पांच सालों से तो कभी कोई केस थाने तक गया ही नहीं है। गांव के लोगों के बीच कोई रंजिश नहीं है। अगर किसी का कोई मनमुटाव हो जाता है तो उन्हें पंचायती तौर पर सुलझा लिया जाता है। करीब 20 एकड़ में बसे इस गांव में करीब 600 लोग रहते हैं। गांव में मंदिर-मस्जिद एक ही साथ हैं। गांव में मिडिल स्कूल हैं।
गांव मसूदपुर : कलानौर कस्बे का गांव मसूदपुर करीब 20 एकड़ में बसा है। सरपंच नरेश बताते हैं कि गांव की करीब 2 हजार की आबादी है, जिसमें करीब 850 महिलाएं हैं। गांव का शिक्षा साक्षरता प्रतिशत 80 से ज्यादा है। गांव में भाईचारे की मिशाल कायम है। गांव में 8 पंच हैं। गांव के सभी लोग पंचायती तौर पर सुनाए गए हर फैसले को स्वीकार करते हैं। यही कारण है कि गांव में लोगों के आपसी मामूली विवाद कभी भी थानों तक नहीं पहुंचते हैं।
गांव सांघाहेड़ी : गांव सांघाहेड़ी भी कलानौर कस्बे के अंतर्गत आता है। गांव की सरपंच सीमा बताती हैं कि करीब 60 एकड़ में बसे इस गांव की जनसंख्या 4000 से अधिक है। जिसमें करीब 2200 लोगों की वोट बनी हुई है। गांव की 90 प्रतिशत जनसंख्या पढ़ी-लिखी है। गांव में स्टेडियम, पार्क और 12वीं तक के सरकारी स्कूल की व्यवस्था है। गांव के लोग बहुत ही शांतिप्रिय हैं। सभी आपसी मनमुटाव को आपसी या पंचायती तौर पर सुलझा लेते हैं।
सदर थाना के अंतर्गत हैं तीन आदर्श गांव
सदर थाना के अंतर्गत आने वाले गांव गुसकानी की सरपंच अनीता बताती हैं कि गांव की जनसंख्या करीब ढाई हजार है। जिनमें से 1250 वोट हैं। गांव करीब 12 एकड़ जमीन पर बसा हुआ है। गांव के आठ सरपंच हैं। गांव के लोग पढ़ लिखकर फौज में लेफ्टिनेंट पद, पीजीआई व खानपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर के पद पर सेवारत हैं। गांव का एक भी मामला थाने के अंतर्गत नहीं जाता है, सब मामले आपसी मशविरे से सुलझा लिए जाते हैं।
कटवाड़ा गांव : सदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला गांव कटवाड़ा की सरपंच बबीता बताती हैं कि गांव की जनसंख्या करीब दो हजार है। गांव में करीब 850 वोट हैं। गांव में 8 पंच हैं। मंदिर-जलघर भी है। आठवीं कक्षा तक का स्कूल भी है। थाने में शिकायत न जाने का रिकॉर्ड 40 साल से भी पुराना है। इसे बरकरार ही रखने के लिए सभी गांववासी एकजुट है।
घिलौड़ खुर्द: सदर थाना के अंतर्गत आने वाला गांव घिलौड़ खुर्द के सरपंच दीपक बताते हैं कि करीब 20 एकड़ में बसा हुआ है। जिसमें करीब 1600 लोग रहते हैं। गांव के 7 पंच हैं। गांव में प्राइमरी स्कूल भी है। 10 सालों से भी ज्यादा समय से गांव का इतिहास थाने तक न पहुंचने का है।
मुगांण गांव : आईएमटी थाना क्षेत्र के अंर्तगत आने वाला गांव मुगांण के सरपंच सुनील बताते हैं कि गांव की जनसंख्या 5 हजार से ज्यादा है। गांव के हिस्से में साढ़े 4 हजार बीघा जमीन आती है। जिसमें गांव की आबादी व खेत हैं। गांव में स्टेडियम, पार्क, मंदिर, जलघर आदि सब है। लोग काफी पढ़े लिखे व शांतिप्रिय हैं। गांव का कोई भी एक मामला करीब 5 साल से थाने तक नहीं गया है।
ये आठ गांव पुलिस विभाग सहित जिलावासियों के लिए आदर्श गांव हैं। ये लोग (मुखिया) या सरपंच के पास या खुद ही आपस में मिल बैठकर विवाद या समस्या का निपटारा कर लेते हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि महिलाओं से संबंधित मामले महिलाएं ही निपटाती हैं। इन गांवों से जिलावासियों को सीख लेते हुए इसी तरह अपनी जिंदगी जीने के लिए प्रयास करना चाहिए।
-गोरखपाल राणा, डीएसपी मुख्यालय।
गांव तैमूरपुर में एक साथ है मंदिर और मज्जिद। अमर उजाला- फोटो : RohtakCity