आर्य समाज के क्रांतिकारी नेता स्वामी अग्निवेश का शुक्रवार शाम को निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। स्वामी अग्निवेश ने आर्य समाज के देशभर का मुख्यालय कार्यालय की शुरूआत 12 मार्च 1968 में की थी। उन्होंने यहां आर्य समाज युवा संगठन की शुरूआत करते हुए अप्रैल 1970 में सन्यास धारण कर आर्य समाजी ग्रहण किया। वे सन 1979 से 1984 तक हरियाणा में शिक्षामंत्री भी रहे।
स्वामी का पहला बड़ा कार्यक्रम भी रोहतक की धरती पर हुआ था। वहीं आर्य समाज से जुड़े बड़े पदाधिकारी बताते हैं कि उनका आखिरी बड़ा कार्यक्रम भी रोहतक की ही धरती पर हुआ था। यह कार्यक्रम 12 मार्च 2019 को आर्य समाज युवा संगठन के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित किया गया था। इस दौरान स्वामी यहां दो दिन व एक रात रुके थे।
हरियाणा की बोली से था प्रेम, कहते थे हरियाणवी होते हैं सच्चे
स्वामी तेलगू से संबंध रखते थे। मगर हरियाणा को बहुत पसंद करते थे। यही कारण था कि उन्होंने अपने सन्यासी जीवन की शुरूआत हरियाणा के रोहतक जिले से की थी। यहां आने पर ही वह हरियाणा बोली को अधिकतर बोलते थे। उनका कहना था कि हरियाणवी सच्चे होते हैं। इन्हें जो भी बात सही अथवा गलत लगती है वह बोलने से झिझकते नहीं हैं।
निधन पर जताया शोक
अखिल भारतीय जन अधिकार मंच के प्रधान महासचिव ललित मोहन सैनी व सिविल रोड टेडर्स यूनियन के प्रधान सूरज रसवंत ने बंधुआ मुक्ति मोर्चा के संयोजक स्वामी अग्निवेश के निधन पर शोक व्यक्त किया है। ललित मोहन सैनी ने कहा कि स्वामी अग्निवेश संत पुरुष व सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सदैव याद किए जाएंगे। उनके निधन से समाज को क्षति हुई है। स्वामी अग्निवेश ने हरियाणा से चुनाव लड़ा व मंत्री भी बने। मजदूरों पर लाठीचार्ज की घटना के बाद उन्होंने राजनीति छोड़ दी थी।