पीजीआई में बच्चा बदलने का शक होने पर प्रसूता के परिजनों ने हंगामा कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रसूता ने बेटे को जन्म दिया है, लेकिन स्टाफ ने उन्हें लड़की थमा दी। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट तक शिकायत पहुंची। दो दिन का रिकॉर्ड जांचा गया तो पाया कि इस दौरान केवल एक ही लड़का पैदा हुआ है और वह भी उक्त प्रसूता के भर्ती होने से पहले।
रिकॉर्ड देखने के बाद पीजीआई प्रबंधन ने राहत की सांस ली और परिजनों ने भी मान लिया कि प्रसूता ने बेटी को ही जन्म दिया है। हुआ यूं कि रेवाड़ी के आनंद नगर निवासी राजीव की पत्नी मीना को मंगलवार शाम को पीजीआई में भर्ती कराया गया।
राजीव ने बताया कि मंगलवार शाम साढ़े पांच बजे मीना को लेबर रूम ले जाया गया और छह बजे एक महिला कर्मचारी ने उन्हें बताया कि मीना को बेटा हुआ है। लेकिन जब मीना को बच्चा सौंपा गया तो वह लड़की थी। मीना ने सास को बताया तो उसने बाहर आकर राजीव को जानकारी दी। इस पर राजीव भड़क गया।
उसने चिकित्सकों से बच्चे के बारे में पूछताछ की। चिकित्सकों के अलावा स्टाफ सदस्यों ने भी उसे बताया कि मीना ने लड़के को ही जन्म दिया था। इसके बाद राजीव और उसके परिजनों ने वार्ड में हंगामा कर दिया। राजीव ने बताया कि हंगामा करने पर चिकित्सक मीना की फाइल ले गए।
जब फाइल मांगी तो देने से इनकार कर दिया गया। क्योंकि फाइल पर चिकित्सकों ने लड़का पैदा होने की पुष्टि लिख रखी थी। करीब दो घंटे के बाद मीना को बेड नंबर 35 पर शिफ्ट कर दिया गया। राजीव ने आरोप लगाया कि फाइल पर चिकित्सकों ने पहले बेटा होने की पुष्टि लिख दी थी, लेकिन विवाद होने के बाद बेटी होने की पुष्टि लिखी।
बुधवार दोपहर तक राजीव के अन्य परिजन और रिश्तेदार भी पीजीआई पहुंच गए। सभी परिजन एकजुट होकर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अशोक चौहान के ऑफिस पहुंचे। हंगामे के बाद एमएस ने लेबर रूम में तैनात स्टाफ और वरिष्ठ चिकित्सकों को बुलवाया।
परिजनों की मौजूदगी में मंगलवार रात से लेकर बुधवार शाम तक हुई सभी डिलीवरी का रिकॉर्ड जांचा गया।पता चला कि इन दो दिनों में केवल एक ही लड़का पैदा हुआ है। वह भी मंगलवार रात दो बजे। लेकिन मीना की डिलीवरी तो शाम को 5 बजे के बाद हुई थी। ऐसे में मीना को लड़का पैदा होने का सवाल ही नहीं उठता।
डॉ. चौहान ने बताया कि स्टाफ के किसी सदस्य ने भूलवश लड़का होने की बात कह दी होगी। इसके बाद राजीव और उनके परिजन लौट आए। रिकॉर्ड की जांच में तो मीना को लड़की पैदा होने की ही पुष्टि हुई है। क्योंकि पूरा रिकार्ड उनके सामने ही चेक किया गया था, ऐसे में अब किसी तरह के शक की गुंजाइश ही नहीं बची है।
पीजीआई के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अशोक चौहान ने कहा कि मैंने दो दिन का डिलीवरी रिकॉर्ड चेक कराया है। इन दो दिनों में केवल एक ही लड़का पैदा होने की पुष्टि हुई है। वह भी मीना के लेबर रूम में एडमिट होने से पहले। मीना ने एक बेटी को ही जन्म दिया है। जांच के बाद राजीव और उसके परिजन शांत हो गए हैं