एमडीयू के बहुचर्चित उत्तरपुस्तिका घोटाले में भगौड़े आरोपी रवि जैमिनी ने आखिरकार सरेंडर कर दिया।
पौने तीन साल पहले सामने आए घोटाले के बाद से ही पुलिस को उसकी तलाश थी। मंगलवार को कोर्ट में सरेंडर के साथ ही पुलिस ने उसको गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने आरोपी को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
2 फरवरी 2013 को एमडीयू के प्रशासनिक भवन की छत पर उत्तरपुस्तिकाएं मिलीं थी। खुलासा होने के बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और विवि के कई कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया।
मामले में सेक्टर 3 निवासी रवि जैमिनी को कोर्ट ने भगौड़ा साबित कर दिया था। रवि ने गुमनाम पत्र भेजकर इच्छामृत्यु भी मांगी थी। उसके परिजन लगातार एसआईटी जांच पर सवाल उठाते रहे हैं। अब जैमिनी की सरेंडर के साथ ही एक बार फिर मामला चर्चा में आ गया है।
एसआई राजकुमार ने बताया कि रिमांड अवधि में आरोपी से घोटाले से जुड़ी अन्य चीजों और दूसरे आरोपियों के बारे में पूछताछ की जाएगी। कई जगहों से निशानदेही भी करवाई जाएगी। पुलिस मामले में पहले करीब आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस को पिछले काफी समय से रवि की तलाश थी।
ये था मामला
फ रवरी 2013 में एमडीयू के पुराने प्रशासनिक भवन के द्वितीय तल की छत पर कुछ उत्तरपुस्तिकाओं के बंडल बिखरे मिले। जांच में पता चला कि ये उत्तरपुस्तिका बीटेक विभाग की दिसंबर 2012 में हुई परीक्षा की हैं। इस मामले के सामने आते ही विवि प्रशासन भी हरकत में आ गया। पुलिस में मामला पहुंचने के बाद एमडीयू ने कार्रवाई करते हुए एक जांच कमेटी का गठन कर दिया। एमडीयू जांच कमेटी ने पुलिस से उत्तरपुस्तिकाओं की सुपुर्द करवाकर इन्हें जांचा। इसमें से कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक 2189 उत्तरपुस्तिकाओं में से 69 में छेड़छाड़ पाई गई। अर्बन एस्टेट थाने में करीब 9 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और चोरी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था।