गिफ्ट वाउचर के नाम पर हिसार और फतेहाबाद की बोगस फर्मों से करीब 1500 करोड़ लेनदेन करने के मामले में अब जांच का दायरा बढ़ गया है। सीजीएसटी ने सोमवार को जहां 18 फर्मों के संचालकों को समन देकर जांच के लिए बुलाया है, वहीं आयकर विभाग इस मामले में संज्ञान लेकर यह पता करने में जुटा है कि इतने बड़े लेनदेन में आयकर की कितनी चोरी हुई है।
इस मामले में दो निजी बैंक भी सीजीएसटी की जांच के दायरे में आए गए हैं। फर्जी फर्म से जुड़े लोगों ने जिन पैन नंबरों का इस्तेमाल किया है, उन नंबरों पर इनकम टैक्स की चोरी का पता चला है। फर्मों की ओर से टीडीएस काटने में नियमों का उल्लंघन किया गया है। ऐसे में आयकर विभाग ने भी जांच शुरू कर दी है।
फतेहाबाद की फर्म ने जमा कराए टैक्स चोरी के 20 लाख रुपये
बीते दिनों 1500 करोड़ रुपये के लेन-देन में करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई थी। मामला पकड़ में आने के बाद सोमवार को फतेहाबाद की एक फर्म की ओर से 20 लाख रुपये जमा कराया गया। अब तक टैक्स वसूली की रकम डेढ़ करोड़ तक पहुंच गई है। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि इन फर्मों की ओर से लेन-देन करने के बाद उसे आयकर विभाग में नहीं दिखाया गया है।
दो बैंकों को भी जारी किया नोटिस
इस पूरे खेल में निजी बैंक प्रबंधन की लापरवाही उजागर हुई है। विभागीय अधिकारी ने यह सवाल उठाया कि आरबीआई गाइडलाइन के उल्लंघन के बाद बैंक की ओर से इसकी सूचना आगे क्यों नहीं दी गई। अगर किसी स्कीम में इस तरह से नियमों का उल्लंघन हो रहा था तो बैंकों को आरबीआई को सूचना देनी चाहिए थी। इसको लेकर दो निजी बैंकों को नोटिस जारी किया गया है।
जांच में मिली कई नकली फर्में
वाउचर स्कीम के तहत विभिन्न लोगों द्वारा छूट या कमीशन लेना दिखाया गया। यह सब आर्थिक गतिविधियों के अंतर्गत आता है। ऐसे लेनदेन पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है। जब विभाग ने जांच की तो ऐसी कई नकली फर्में मिलीं, जिनका अस्तित्व ही नहीं था। इन फर्मों द्वारा फर्जी क्रेडिट करके लेनदेन पर फर्जी रिफंड लिया गया।
अब तक डीलरों से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये जीएसटी वसूल किया जा चुका है। अभी आगे की जांच जारी है। हिसार व फतेहाबाद की 18 फर्मों को समन जारी किया जा चुका है। इस पूरे खेल में इनकम टैक्स एक्ट का भी उल्लंघन पाया गया है। उस एंगल पर भी जांच चल रही है।
- विजय मोहन जैन, आयुक्त, सीजीएसटी रोहतक।