सुपवा के विद्यार्थियों की पढ़ाई पर कोविड का सीधा असर पड़ा है। ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान विद्यार्थी प्रैक्टिकल स्टडी नहीं कर पाए। सुपवा में फिल्म एंड टेलीविजन, डिजाइन, विजुअल आर्टस से लेकर आर्किटेक्चर सभी विभागों में प्रैक्टिकल पढ़ाई होती है। फैशन डिजाइन में सिलाई व कटिंग, एसेसरीज डिजाइन में एसेसरीज, बैग, जूतों से लेकर एफटीवी में फिल्में शूट करने में डायरेक्शन, प्रोडक्शन व एक्टिंग सब प्रैक्टिकल पर आधारित पढ़ाई है। ऐसे में 80 प्रतिशत पढ़ाई प्रैक्टिकल तो 20 प्रतिशत थ्योरी होती है। लेकिन कोरोना के कारण वर्ष 2020-21 के सत्र में ऑनलाइन पढ़ाई हुई और परीक्षाएं अब ऑफलाइन हो रही हैं। इससे विद्यार्थियों को समस्या हो रही है। हालांकि विवि प्रशासन ने प्रथम वर्ष को छोड़कर सभी की पढ़ाई को फिलहाल के लिए आगे बढ़ाकर अगले सेमेस्टर में जोड़ दिया है। प्रथम वर्ष की पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है, जिनकी परीक्षाएं अप्रैल में होंगी।
अपीयर करने के चक्कर में बिना प्रोजेक्ट शूट कराए लगा दिए नंबर
एफटीवी विभाग के छठे सेमेस्टर के 10 मिनट के प्रोजेक्ट के बिना प्रोजेक्ट फिल्में शूट कराए ही फैकल्टी ने विद्यार्थियों को अपीयर करने के चक्कर में नंबर लगा दिए। कोरोना काल में सरकार की गाइड लाइन के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान विद्यार्थियों को अपीयर करने के चलते प्रोजेक्ट फिल्मों की प्रैक्टिकल के नंबर लगाए जा चुके हैं, लेकिन विद्यार्थियों ने प्रैक्टिकल पढ़ाई और प्रोजेक्टर की मांग को लेकर सितंबर से दिसंबर तक ऑनलाइन कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया था। इसके कारण यह प्रोजेक्ट 16 फरवरी से 12 मार्च तक कराए गए। अब इन 10 मिनट प्रोजेक्ट फिल्मों की प्रैक्टिकल होती है तो विद्यार्थियों को प्रस्तुति के आधार पर दोबारा अंक दिए जाएंगेे।
छह के बजाय मिला एक माह का समय
क्लास बहिष्कार के बाद सभी विद्यार्थियों से 10 मिनट के प्रोजेक्ट कराए गए हैं। 10 मिनट प्रोजेक्ट को शूट करने के लिए पहले 6 महीने मिलते थे, जिसमें वर्कशॉप और कक्षाएं भी शामिल होती थी। लेकिन कोरोना की वजह से अब वर्कशॉप व कक्षाएं नहीं हो पाई और प्रोजेक्ट की तैयारी व शूट करने के लिए एक महीने का समय मिला। फाइनल ईयर के जो डिग्री प्रोजेक्ट जून में पूरा होना चाहिए था, वह दिसंबर में जाकर पूरा होगा।
-दीपक जैन, सिनेमैटोग्राफी व एफएसए प्रधान
कक्षाओं में जो प्रैक्टिकल काम होना था, वर्कशॉप होनी थी। वह सब ऑनलाइन हुआ, जिसकी वजह से समझने में दिक्कत हुई। प्रैक्टिल में हम प्रैक्टिकल काम दिखाते थे, लेकिन इस बार पीपीटी की प्रिंट आउट की फाइल बनाकर निर्णायक मंडल को दिखाई।
- निक्की कादियान, एसेसरीज डिजाइन
स्टूडियो में होने वाली प्रैक्टिस नहीं हो पाई। थीम पर आधारित काम हमने ऑनलाइन भी कर लिया। प्रैक्टिकल में उनकी पीपीटी बनाकर दिखाई। पोर्टफोलियोव प्रैक्टिकल के बाहर से आने वाली फैकल्टी भी नहीं आ पाई। हमने पेंटिंग व मॉड्यूल्स संबंधी सभी प्रैक्टिकल काम घर पर रहकर ही किया।
- अमनदीप खत्री, विजुअल आर्टस
ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से हमारा प्रैक्टिकल काम नहीं हो पाया। कॉन्सेप्ट तय किए गए, लेकिन प्रोडक्ट नहीं तैयार हो पाए। शुरुआती डिजाइन भी नहीं हो पाए। जो सेमेस्टर जा चुका है उसका काम दूसरे सेमेस्टर में नहीं कराया गया, जिसकी वजह से डिजाइन का काम नहीं सीख पाए। लैब में होने वाली सिलाई व कटिंग का काम नहीं सीख पाए।
- तमन्ना बल्हारा, फैशन डिजाइन
विद्यार्थियों की ऑनलाइन कक्षाएं चल रही थी। बहुत सारी चीजें ऑनलाइन स्टडी में नहीं हो पाती। सभी विभागों की परीक्षाएं ऑफलाइन ली गई हैं। विद्यार्थी कैंपस में आकर शिक्षकों ने अपनी समस्याओं से संबंधित बात कर सकते थे। कुछ पाठ्यक्रम को फिलहाल के लिए आगे बढ़ाकर अगले सेमेस्टर में जोड़ा गया है।
- डॉ. बेनुल तोमर, जनसंपर्क निदेशक