फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rohtak: अब पढ़ाई का नुकसान, परीक्षा स्थगन व एफआईआर रद्द न होने तक विद्यार्थियों का आमरण अनशन शुरू

Fri, 23 Dec 2022 09:50 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)

सार

पीजीआई में बॉन्ड पॉलिसी के खिलाफ आंदोलनरत एमबीबीएस विद्यार्थियों ने फैसला लिया है। आंदोलन के चलते पिछले 53 दिनों से पढ़ाई नहीं होने के कारण खुद को 26 दिसंबर से शुरू होने वाली परीक्षा देने में असमर्थ बताते हुए शैक्षणिक नुकसान की भरपाई की मांग की है।
विज्ञापन
हड़ताल पर बैठे एमबीबीएस विद्यार्थी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा के रोहतक में एमबीबीएस के विद्यार्थी अपनी मांगों को लेकर क्रमिक अनशन के 29वें दिन आमरण अनशन पर बैठ गए। बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में चल रहे आंदोलन के चलते पिछले 53 दिनों से पढ़ाई नहीं होने के कारण खुद को 26 दिसंबर से शुरू होने वाली परीक्षा देने में असमर्थ बताते हुए शैक्षणिक नुकसान की भरपाई की मांग की है।

विज्ञापन


परीक्षा स्थगित करने के साथ विद्यार्थियों ने अपने ऊपर दर्ज एफआईआर भी वापस लेने की आवाज उठाई है। इन तीन मुख्य मांगों का समाधान नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। इस संबंध में विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अनीता सक्सेना को भी पत्र लिखा है। 

बॉन्ड पॉलिसी के संबंध में सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन से बने संशय को दूर करते हुए आंदोलनकारी विद्यार्थियों ने शुक्रवार शाम आमरण अनशन शुरू कर दिया। इस संबंध में विद्यार्थियों ने गहन मंथन के बाद फैसला लिया है। इससे पूर्व कुलपति से भी मुलाकात कर अपनी समस्याओं के समाधान पर चर्चा की।
विज्ञापन


इसमें आंदोलन के चलते हुए उनकी पढ़ाई के नुकसान की पूर्ति, परीक्षा स्थगित करने व विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज एफआरआई रद्द कराना मुख्य रूप से शामिल है। विद्यार्थियों का कहना है कि इन तीन मांगों को लेकर समाधान शीघ्र किया जाए। जब तक इनका समाधान नहीं होगा, आमरण अनशन जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी 53 दिनों से आंदोलनरत हैं। इसके चलते पढ़ाई नहीं हो पाई। नियमानुसार कक्षा के घंटे भी पूरे नहीं हुए। इस परिस्थिति में परीक्षा आयोजित करना बेकार है। इसलिए परीक्षा स्थगित की जाए। आंदोलनकारी विद्यार्थियों के खिलाफ एफआईआर भी बेबुनियाद दर्ज की गई है।

विद्यार्थी अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे थे। इसलिए इसे जल्द रद्द किया जाएगा। इसलिए कोर कमेटी सदस्यों ने खुद आमरण अनशन पर बैठने का फैसला लिया है। जब तक सरकार जनहित और विद्यार्थी हित में फैसला नहीं लेती है, यह आंदोलन जारी रहेगा। 

सीएम के ट्विट से नाराज हैं विद्यार्थी 
आंदोलनकारी विद्यार्थियों में सरकार के प्रति खासा रोष व्याप्त है। सीएम के बाइक चोरी मामले में किए गए एक ट्विट से विद्यार्थी नाराज हैं। उनका कहना है कि एक व्यक्ति की बाइक चोरी होने पर उसने ट्विट किया। सीएम के पास उस ट्विट का जवाब देने का समय है, मगर 53 दिन से आंदोलनरत विद्यार्थियों की समस्या के समाधान के लिए समय नहीं है। यह निंदनीय है। सीएम व सरकार को इस ओर गंभीरता से सोचते हुए शीघ्र उचित फैसला लेना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें