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Rohtak News: एमडीयू के मंच पर विद्यार्थियों का धमाल

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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के 43वें इंटर जोनल यूथ फेस्टिवल यूनिफेस्ट-24 में मंगलवार को हरियाणवी व राजस्थानी गीतों पर प्रतिभागियों के साथ दर्शक जमकर झूमे। प्रतिभागियों ने अलग-अलग छह मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वन एक्ट प्ले, मिमिक्री, लोकगीत, वेस्टर्न इंस्ट्रयूमेंट, हरियाणवी व पंजाबी कविता, पोस्टर मेकिंग, मेहंदी, डिबेट, बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट, कोलाज शामिल रहे। टैगोर सभागार में मुख्य मंच पर विद्यार्थियों ने एकल नृत्य की प्रस्तुति से मन मोहा। यूनिफेस्ट के तहत विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थी 35 से ज्यादा विधाओं में हिस्सा ले रहे हैं।
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यूनिफेस्ट के प्रातःकालीन सत्र में डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. अनूप सिंह मान ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति राष्ट्र में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम है। विद्यार्थी व युवजन अपनी असीमित ऊर्जा को रचनात्मक दिशा में लगाएं। डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रणदीप राणा, निदेशक युवा कल्याण डॉ. प्रताप राठी व आयोजन सचिव प्रो. दिव्या मल्हान ने पुष्प गुच्छ भेंट कर डीन एकेडमिक अफेयर्स का स्वागत किया।
उद्घाटन सत्र में कौमी एकता सप्ताह व राष्ट्रीय एकता-अखंडता एवं सांप्रदायिक सद्भाव दिवस के उपलक्ष्य में निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी ने राष्ट्रीय एकता-अखंडता की शपथ दिलाई। मंच संचालन डॉ. जोगेंद्र मोर, डॉ. रवि प्रभात, डॉ. सपना व डॉ. एकता राजलीवाल ने किया। टैगोर सभागार में आज एकल नृत्य में नृत्य की छटा बिखरी। टैगोर सभागार में ही हरियाणवी स्किट ने खूब मनोरंजन किया। टैगोर सभागार गैलरी में पर्यावरण विषय पर प्रतिभागियों ने पोस्टर मेकिंग स्पर्धा में भाग लिया। मेहंदी इवेंट में प्रतिभागियों ने सुंदर मेहंदी सजाई। बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट व कोलाज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
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राधाकृष्णन सभागार में आयोजित नाटक स्पर्धा में प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियाें से ज्वलंत सामाजिक मुद्दों पर दर्शकों का ध्यान केंद्रित किया। समाज में महिलाओं की स्थिति व समाज की दशा-दिशा पर नाटकों के जरिए प्रभावी संदेश दिया। मिमिक्री इवेंट में जीव-जंतु, मशीन व नामी हस्तियों की नकल उतारी। दोपहर कालीन सत्र में डीन, कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल प्रो. विनीता हुड्डा बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रही।साहित्यिक इवेंट्स में काव्य पाठ (हरियाणवी व पंजाबी) एलोक्यूशन व वाद विवाद प्रतियोगिता हुई। यहां शिक्षा के निजीकरण मुद्दा छाया रहा। पक्ष-विपक्ष से तर्कों के तीखे तीर चले। अंबेडकर हाल में लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने लुभाया। पाश्चात्य वादन संगीत का भी जादू खूब चला।
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