रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों का विरोध लगातार चौथे दिन रविवार को भी जारी रहा। इस दौरान शहीद भगत सिंह छात्र संगठन के अध्यक्ष प्रदीप मोटा ने आरोप लगाए हैं कि विश्वविद्यालय में जो भी छात्र, शिक्षक या कर्मचारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे नोटिस देकर और बाद में परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाकर दबाने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने इसे तानाशाही रवैया करार दिया। छात्रों ने कुलाधिपति को लिखित शिकायत भेजकर भ्रष्टाचार की जांच की मांग की है। डाॅ. आंबेडकर मिशनरीज विद्यार्थी एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम सिंह डुमोलिया ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में सांविधानिक प्रतिनिधित्व की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने रोस्टर प्रणाली और हरियाणा सरकार की नई एसओपी की अवहेलना, 1979 से पहले के रोस्टर को वेबसाइट से हटाने, 239 शिक्षकों के नाम रोस्टर रजिस्टर से गायब होने और 30 से 35 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति जैसे आरोप लगाए।
एसएफआई के छात्र नेता अमित कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बावजूद विवि में भर्तियां की जा रही हैं। संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले छात्र विभागों में पोल खोलो कार्यक्रम चलाने की चेतावनी दे रहे हैं। धरने में कई छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।