रोहतक। एमडीयू में नए शैक्षणिक सत्र से लागू किए जा रहे नए कोर्स व फीस विद्यार्थियों-अभिभावकों पर एक अतिरिक्त बोझ होगा। एनईपी 2020 के तहत विवि प्रशासन ने बहुआयामी शिक्षा देने के बहाने पंचवर्षीय पीजी कोर्स समाप्त कर चार वर्षीय स्नातक यानी यूजी कोर्स शुरू किए हैं। रविवार को अमर उजाला ने छात्र संगठनों से नई व्यवस्था को लेकर बातचीत की। छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह शिक्षा के निजीकरण की ओर बढ़ाया गया बड़ा कदम है। इन कोर्सों की फीस भी नए सिरे से लागू की गई है। यह पुराने पंचवर्षीय कोर्स के मुकाबले चार से पांच गुणा अधिक है। साधारण परिवारों के लिए इतनी फीस चुकाना आसान नहीं है। नए चार वर्षीय कोर्स किसी भी तरह से सही नहीं है। दिल्ली विश्वविद्यालय में यह व्यवस्था फेल हो चुकी है, इसके बावजूद प्रदेश में इसे लागू किया जा रहा है। इसका विराेध किया जाएगा।
एमडीयू में नया शैक्षणिक सत्र नए कोर्स केे साथ शुरू हो रहा है। फीस भी नई तय की गई है, जो बहुत ज्यादा है। पिछले वर्ष तक चल रहे पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स के मुकाबले यह फीस चार से पांच गुणा अधिक है। मध्यम व गरीब परिवार के विद्यार्थियों के लिए इतनी फीस चुकाना मुश्किल है। इस पर रोक लगाना जरूरी है।
अमित, राज्य सचिव, एसएफआई।
स्कूल के बाद विद्यार्थी विश्वविद्यालयों में पढ़ने का सपना देखते हैं। यहां पढ़ाई कर वे अपना भविष्य संवारने के साथ-साथ समाज व देश की उन्नति में सहभागी बनते हैं। इस बार ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है। एमडीयू की ओर से तय की गई फीस विद्यार्थियों का सपना तोड़ने वाली साबित होगी। इसलिए सभी छात्र संगठन इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।
हरीश सैनी, प्रदेश अध्यक्ष, एआईडीएसओ।
गरीब परिवार के बच्चे विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर अपना बेहतर भविष्य संवारने का सपना देखते हैं। फीस कम नहीं हुई तो विवि में विद्यार्थियों की संख्या भी प्रभावित होगी। सभी कोर्सों में सभी सीटें भरना मुश्किल होगा। एमडीयू प्रशासन नई व्यवस्था में बदलाव कर पुरानी व्यवस्था की सुचारु करे।
अभिषेक, अध्यक्ष, छात्र एकता मंच।
स्कूल शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रदेश में एमडीयू बड़े विकल्पों में से एक है। छात्र कड़ी मेहनत से अच्छे अंक हासिल करने के अलावा लिखित परीक्षा भी पास करते हैं। विद्यार्थियों को साल में 40 हजार रुपये फीस देनी पड़ेगी। यह युवाओं के साथ अन्याय है। विवि प्रशासन को यह फैसला वापस लेना चाहिए।
दीपक धनखड़, पूर्व अध्यक्ष, सीवाईएसएस।
02सीटीके05...दीपक धनखड़। संवाद
02सीटीके05...दीपक धनखड़। संवाद
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