क्लासिकल म्यूजिक में रुचि रखने वाले प्रदेश भर के विद्यार्थियों के लिए यह खबर अच्छी है।
अब उन्हें क्लासिकल संगीत में तबला और हारमोनियम कोर्स करने के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा।
विद्यार्थी अब रोहतक की एमडी यूनिवर्सिटी में ही तबले की थाप पर ता-ता...थैया करते नजर आएंगे।
लंबे समय से चल रही जद्दोजहद के बाद एमडीयू को ‘संगीत शिरोमणि इन तबला’ और ‘संगीत शिरोमणि इन हारमोनियम’ की मंजूरी मिल गई है।
संगीत एक कला ही नहीं, बल्कि एक साधना भी है। जितना असर मौखिक संगीत यानि गाने का रस मन को आनंद दिलाता है उसी तरह वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि भी मन को तृप्त करती है।
इसी थीम और उद्देश्य के साथ एमडीयू में काफी समय से तबला और हारमोनियम कोर्स की मांग की जा रही थी, लेकिन किसी न किसी कारणों से दोनों कोर्सों को मंजूरी नहीं मिल रही थी। लंबे समय बाद अब यूजीसी ने इसी सत्र से एमडीयू को ‘संगीत शिरोमणि इन तबला’ और ‘संगीत शिरोमणि इन हारमोनियम’ के कोर्स शुरू करने के लिए मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के साथ एमडीयू प्रदेश की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी बन गई, जिसमें यह दोनों कोर्स शुरू किए गए हैं। अभी तक यह किसी भी यूनिवर्सिटी या कॉलेज में नहीं थे।
सेमेस्टर में होगी दोनों कोर्सों की पढ़ाई
यूजीसी ने शुरुआती सत्र के लिए दोनों कोर्सों में 20-20 सीटें आवंटित की है। दो वर्षीय कोर्स में चार सेमेस्टर रखे जाएंगे। पहले छह माह थ्योरी और दूसरे सेमेस्टर में प्रैक्टिल कराया जाएगा। इसी तरह तीसरे और चौथे सेमेस्टर में पढ़ाई कराई जाएगी। इन दो नए कोर्सों के लिए अलावा अभी तक एमडीयू के संगीत विभाग में एमए इंस्ट्रूमेेंटल सितार, एमए वोकल, एमफिल इंस्ट्रूमेेंटल, एमफिल वोकल और प्री-पीएचडी कोर्स संचालित है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में जाते थे प्रदेश के विद्यार्थी
संगीत से जुड़ा विद्यार्थी यदि तबला और हारमोनियम का कोर्स करना चाहता है तो इसके लिए उन्हें अभी तक दिल्ली यूनिवर्सिटी या फिर दूसरे प्रदेशों बनारस, अहमदाबाद आदि स्थानों पर जाना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें यह कोर्स करने के लिए प्रदेश से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
काफी प्रयासों के बाद यूनिवर्सिटी में इन कोर्सों के लिए स्वीकृति मिली है। इसका श्रेय वीसी सुधीर राजपाल को जाता है। इसी सत्र से दोनों कोर्सों में दाखिले कर पढ़ाई शुरू करा दी जाएगी।
-प्रो. भारती शर्मा, एचओडी संगीत विभाग एमडीयू।