रोडवेज बस में दो बहनों से कथित छेड़छाड़ मामले में नया मोड़ आ गया है।
मामला स्टेट क्राइम बांच को सौंपे जाने के बाद नए सिरे से जांच की बात कही जा रही थी।
लेकिन स्टेट क्राइम ब्रांच ने रोहतक पुलिस की एसआईटी की चार्जशीट पर ही मुहर लगा दी और कोर्ट में पेश करवा दिया।
चालान को लेकर अब दोनों पक्ष विरोध में आ गए हैं। चार्जशीट में दाखिल की गई पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट में लड़कियों के जवाब को संदेहास्पद बताया गया है।
50 गवाह, अधिकतर के बयान लड़क ों के पक्ष में
चालान में करीब 50 गवाहों को शामिल किया गया है। इनमें पुलिसकर्मी, डॉक्टर, वीडियो बनाने वाला, बस सवारी सहित अन्य शामिल हैं। अधिकतर गवाहों ने अपने बयान में एक बार भी बस में छेड़छाड़ का जिक्र नहीं किया है। अधिकतर ने बस में लड़ाई झगड़े की बात मानी है।
एसपी डीएसपी चाहते थे चालान पेश करवाना
चालान पेश होते ही पुलिस प्रशासन दोनों पक्षों के निशाने पर आ गया है। दोनों बहनों के पिता राजेश कुमार का कहना है कि कोर्ट में आरोपियों को संदेह का लाभ देने के लिए पुलिस ने चालान पेश किया है। राजेश कुमार मंगलवार को रोहतक पहुंचे और अपने वकील अतर सिंह पंवार से बात की। राजेश ने बताया कि समझौते का दबाव बनाने के लिए घटना के समय एसपी व डीएसपी घंटों तक रात को ऑफिस में बैठाए रखते थे। जब दबाव से काम नहीं चला तो पुलिस ने मनमानी से जो चाहा था वह कर दिया।
लड़कियों और लड़कों से एक बार पूछताछ, फिर चालान पेश
क्राइम ब्रांच के पास जांच के बाद दोनों बहनों और लड़कों से बस एक बार ही पूछताछ की गई। अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर दूसरे मामले से जुड़े आरोपी फौजी और गवाहों से पूछताछ की। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों को वारदात स्थल का भी मुआयना करना था।
आमने-सामने
एसआईटी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
जब जांच स्टेट क्राइम ब्रांच कर रही है तो एसआईटी के पास कोर्ट में चालान पेश करने का अधिकार नहीं है। ऐसा करने पर एसआईटी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस ने तीनों लड़कों को आरोपी तो सिद्ध कर दिया। चालान रिपोर्ट देखने के बाद आगे की कार्रवाई के बारे में विचार किया जाएगा। साथ ही क्राइम ब्रांच के अधिकारियों से संपर्क किया जाएगा।
अतरसिंह पंवार, पीड़ित पक्ष के वकील
लड़कियों के बयान के अलावा कोई सबूत ही नहीं
पुलिस ने कोर्ट में जो चालान पेश किया, उसमें सबूत के तौर पर मात्र दोनों बहनों के बयान हैं। पुलिस के पास युवकों के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं है। पुलिस ने अपना पीछा छुड़ाने के लिए जल्दबाजी में चालान पेश किया है। हम कोर्ट में एफआईआर कैंसिल करने की मांग करेंगे। हां, एसआईटी को कोर्ट में चालान पेश करने का पूरा अधिकार है। क्योंकि मामला उनक ी सीमाक्षेत्र का है। इसलिए संबंधित एसएचओ ही चालान तैयार कर कोर्ट में पेश करता है। यदि स्टेट क्राइम ब्रांच मामले में कुछ अन्य तथ्य जुटाती है तो उसे सप्लीमेंट्री चालान के तहत कोर्ट में पेश किया जा सकता है।
प्रदीप मलिक, संदीप राठी, लड़के पक्ष के वकील
किसी भी हालत में हम चालान से संतुष्ट नहीं हैं। जो एसआईटी पहले से ही आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही हो उसके चालान पर कैसे विश्वास किया जा सकता है। आईजी ने मामले को एसआईटी से लेकर स्टेट क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किया था। जल्द ही आईजी और स्टेट क्र्र्राइम ब्रांच के अधिकारियों से गुहार लगाऊंगा।
राजेश कुमार, दोनों बहनों के पिता
स्टेट क्राइम ब्रांच की ओर से एसआईटी द्वारा बनाए गए चालान को ही कोर्ट में पेश किया गया है। उसमें कुछ तथ्य शामिल करने के बाद पेश किया गया है। तकनीकी पहलुओं को साझा नहीं किया जा सकता है।
राजश्री, डीआईजी स्टेट क्राइम ब्रांच