रोहतक। श्रावण महीने के शुरू होते ही शिव भक्तों ने शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक करना शुरू कर दिया है। मंगलवार को बाबा बालक पुरी डेरे में रुद्राभिषेक कार्यक्रम शुरू किया गया, यह 15 अगस्त तक जारी रहेगा। इसके अलावा दुर्गा भवन मंदिर, किलोई शिव मंदिर, वैश्य शिक्षण संस्थान स्थित शहर के 100 से अधिक शिव मंदिरों में पूरे महीने शिव भक्त भोले बाबा की आराधना करेंगे।
महंत कर्णपुरी ने बताया कि डेरे पर सुबह साढे़ छह बजे से नौ बजे तक पंडित सुरेश वशिष्ठ वैदिक मंत्रोचारण के साथ रुद्राभिषेक कराएंगे। इस माह में जो भक्त व्रत रखते हैं, उन्हें शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सोमवार को शिवलिंग पर शिवामुट्ठी अर्पित की जाती है। पहले सोमवार को कच्चे चावल, दूसरे को सफेद तिल, तीसरे को खडे़ मूंग व चौथे को जौ की एक मुट्ठी चढ़ाई जाती है। पंडित सुरेश वशिष्ठ ने बताया कि रुद्राभिषेक के लिए आने वाले शिव भक्तों को साफ मन से आना चाहिए। शिव पूजा से ग्रह बाधा दूर होने के साथ जीवन में सार्थक परिणाम मिलते हैं।
मनोरथ पूर्ति व संकट मुक्ति के लिए होता है अलग-अलग अभिषेक
दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी एवं ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज मिश्र के अनुसार मनोरथ पूर्ति व संकट मुक्ति के लिए अलग-अलग धाराओं से शिव का अभिषेक होता है। जब मन बेचैन हो, निराशा से भरा हो, परिवार में कलह हो, अनचाहे कष्ट मिल रहे हों तो शिवलिंग पर दूध की धारा चढ़ाना चाहिए। सभी धाराओं में सबसे श्रेष्ठ गंगा जल की धारा मानी जाती है। शिव को गंगाधर भी कहा जाता है और शिव को गंगा जल काफी प्रिय है। इससे भगवान का अभिषेक करने पर चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है। इस अभिषेक को करने के दौरान महामृत्युंजय का जाप करना चाहिए। इस जप को करने से फल प्राप्ति कई गुणा बढ़ जाती है।