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Rohtak News: नशेड़ियों का अड्डा बने खेल परिसर

Tue, 28 May 2024 11:33 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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रोहतक। नशे का दंश युवाओं को डस रहा है। पढ़ने-लिखने की उम्र में युवा अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। शहर के विभिन्न खेल परिसर भी कुछ यही बयां कर रहे हैं। ये खेल परिसर नशेड़ियों का अड्डा बने हुए हैं। यहां भारी मात्रा में नशे में प्रयोग होने वाली सामग्री बिखरी पड़ी रहती है। अमर उजाला टीम ने छोटू राम स्टेडियम का जायजा लिया तो यह सच सामने आया। इससे पूर्व राजीव गांधी खेल परिसर, एमडीयू व अन्य के हालात भी जांचे जा चुके हैं।
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स्टेडियम के विभिन्न कोनों में नशे की सामग्री बिखरी पड़ी है। इसमें शराब की खाली बोतलें ही नहीं, इंजेक्शन, सिरिंज, खाली शीशियां, चमकीले रैपर व अन्य सामग्री शामिल हैं। इसके अलावा दवाओं की शीशियां व खाली पत्ते भी पड़े मिलते हैं। स्टेडियम के शौचालयों की हालत और भी खराब है। यहां दर्जनों सिरिंज, निडिल, दवा की खाली शीशियां पड़ी मिलती हैं। यहां के कुछ खास कोने ऐसे हैं, जहां कोई आता-जाता नहीं है। इनमें भी नशेड़ियों का अड्डा रहता है। यहां उगीं झाड़ियों में नशे की सामग्री का प्रयोग किया गया ढेर पड़ा हुआ है।
शहर के बीच स्थित छोटू राम स्टेडियम में रोजाना सैकड़ों खिलाड़ी प्रशिक्षण के लिए आते हैं। कोच की देखरेख में अपना कौशल निखारते हैं। स्टेडियम परिसर में इन्हें भी नशे में प्रयुक्त इंजेक्शन, नशीली दवा व अन्य चीजें नजर आती हैं। ऐसे में इनके नशे की दलदल में फंसने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
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नशा करने में कॉलेज व विवि के छात्र ज्यादा

युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए पुलिस की तरफ से अभियान चलाया जा रहा है। कॉलेजों व विवि में ऐसे युवाओं की संख्या अधिक हैं। युवा नशे की लत के शिकार बन रहे हैं। जब तक परिवार को बच्चों के नशे का शिकार बनने का पता चलता है, तब तक वे इसके आदी हो चुके होते हैं।

हुक्के और सिगरेट से होती है नशे की शुरुआत

युवा शुरू में शोक के लिए सिगरेट और हुक्का पीना शुरू करते हैं। यह शौक ही उनकी आदत बन जाती है। वह नशे के इस जाल में फंसते चले जाते हैं।



स्टेडियम परिसर में बाहर के युवा आकर नशा करते हैं। इससे खिलाड़ियों को भारी परेशानी होती है। स्टेडियम परिसर के कोनों में नशे की सामग्री बिखरी पड़ी रहती है। नशेड़ी यहां बैठकर नशा करते हैं और नशे में प्रयोग सामग्री छोड़ जाते हैं।
- विनोद कुमार, रोहतक





स्टेडियम में नशा करने वालों पर रोक लगनी चाहिए। यहां महिला खिलाड़ी भी प्रशिक्षण के लिए आती हैं। इनकी सुरक्षा के लिए पुलिस की भी व्यवस्था होनी चाहिए। नशा किसी के लिए भी अच्छा नहीं है।
- भूपेंद्र सिंह, विशाल नगर





स्टेडियम में सैकड़ों युवा खेलों का अभ्यास करने आते हैं। यहीं कुछ नशेड़ी नशा करते हैं। इससे खिलाड़ियों पर भी सवालिया निशान लगते हैं। खेल परिसर का माहौल खराब होता है। इस पर रोक लगनी चाहिए।
- सारिका मलिक, रोहतक





खेल परिसर में बाहरी लोग आकर नशा करते हैं। नशे के बाद छोड़ी गई सामग्री यहीं पड़ी रहती है। यह सामग्री खेल परिसर व खिलाड़ियों की छवि धूमिल करती है। इस पर रोक लगनी चाहिए। खिलाड़ियों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।
- वंदना, रोहतक

वर्जन

स्टेडियम में बाहर के युवा आकर नशा करते हैं। ये निजी अकादमी से भी हो सकते हैं। कुछ संदिग्ध कई बार नजर भी आए तो उन्हें पकड़ा भी गया। इसके बावजूद चोरी-छिपे परिसर में आकर नशा करते हैं। इनकी वजह से माहौल पर बुरा असर पड़ रहा है।
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- मनोज कुमार, जिला खेल अधिकारी
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