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गीत-संगीत है अध्यात्म का आधार : पद्मश्री कैलाश खेर

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बोहर गांव में जाट संस्था के पूर्व प्रधान राज सिंह नांदल के घर पहुंचे गायक कैलाश खेर को सम्मानित
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रोहतक। गीत-संगीत प्रकृति का सर्वोत्तम वरदान है, इसके माध्यम से प्रेम और मानवता का संदेश जन-जन तक पहुंचता है। इस धर्म को अनवरत निभा रहा हूं। गीत-संगीत सदैव से अध्यात्म का आधार रहा है। सदियों से इसी माध्यम से हमारे संत और ऋषि- मुनियों ने प्रभु की आराधना कर साक्षात्कार किया। यह बात जाने-माने गायक और पद्मश्री पुरस्कार विजेता कैलाश खेर ने वीरवार को जाट शिक्षण संस्था के पूर्व प्रधान राज सिंह नांदल के निवास पर कही।
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पद्मश्री कैलाश खेर ने बताया कि उनका बचपन से ही लगाव अध्यात्म और गीत-संगीत की ओर रहा है, उन्हें आरंभ से ही संत-महात्माओं का सानिध्य मिलता रहा है। हमारा देश सदैव से ही दुनिया को ज्ञान और आध्यात्म के आलोक से प्रकाशमान करता रहा है। हमारे ऋषि-मुनियों और संत-महात्माओं ने अपने ज्ञान, योग और तप से आध्यात्मिक क्षेत्र में विश्व पटल पर भारत का परचम लहराया है। आज भी दुनिया में भारत की ख्याति आध्यात्मिक विश्व गुरु के रूप में है। भगवान शिव की स्तुति उन्हें सर्वाधिक प्रिय है। जब वे शिव बाबा की स्तुति करते हैं तो उनका मन मयूर नाच उठता है। जाट शिक्षण संस्था के पूर्व प्रधान राज सिंह नांदल ने कहा कि कैलाश खेर ने अपने गीतों के माध्यम से दुनिया में प्रेम और मानवता का संदेश देकर महान कार्य किया है। इसके चलते आज दुनिया भर में करोड़ों लोग उनके गीतों के दीवाने हैं। मां सरस्वती की उन पर असीम कृपा है।
इस अवसर पर पायलट नीरज सहरावत, पूर्व सरपंच राजेंद्र सिंह सांगवान, युवा नेता आशीष नांदल, विपिन सहारण, मनजीत फौगाट, आदित्य नांदल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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