रोहतक। संपोषणीय विकास सुनिश्चित करने के लिए संपोषणीय जीवन शैली अपनाने का आह्वान महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने वीरवार को एमडीयू के वाणिज्य विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में अध्यक्षीय भाषण में किया। कुलपति ने प्राकृतिक संसाधनों के उचित प्रयोग पर विशेष जोर दिया।
भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की ओर से प्रायोजित- एचीविंग ससटेनीबिलिटी एट 75: इंडियाज मार्च टूवार्ड्स बीकमिंग ए डेवलप्ड नेशन बाई 2047 विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी वीरवार को संपन्न हो गई। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में एमडीयू कुलपति ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय क्षरण प्रमुख चुनौती बनकर उभरे हैं। स्वास्थ्य संबंधित चुनौतियां भी हमारे सामने आ रही हैं। ऐसे में समग्र, समावेशी, संपोषणीय विकास समय की जरूरत है। प्राचीन समय में लोगों की जीवन शैली, खानपान में संपोषणीय समाहित रही। हम संपोषणीय जीवन शैली व प्राकृतिक जीवन परंपरा को अपनाएं। उन्होंने वाणिज्य विभाग को इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन के लिए बधाई देते हुए विश्वविद्यालय के भविष्योन्मुखी विकास का संपोषणीय मॉडल तैयार करने का आग्रह किया।
समापन समारोह में संगोष्ठी थीम पर आधारित ससटेनीबिलिटी विषय पर लिखी पुस्तक का लोकार्पण किया गया। वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजपाल ने स्वागत भाषण दिया। प्रो. राजपाल ने बताया कि संपोषणीय विकास के विविध पहलुओं पर इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में गहन मंथन हुआ। संगोष्ठी आयोजन सचिव डॉ. मनोज कुमार ने संगोष्ठी संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि इसमें 10 तकनीकी सत्रों में लगभग 100 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। आभार प्रदर्शन संगोष्ठी संयोजक डॉ. सीमा राठी ने किया। संचालन डाॅ. रेखा धींगड़ा ने किया।
संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स से प्रो. मदन लाल, हरियाणा केंद्रीय विवि से प्रो. आरपी मीणा ने बतौर रिसोर्स पर्सन शिरकत की। संगोष्ठी में लगभग 200 डेलीगेट्स शामिल हुए। इस मौके पर प्रो. आरआर सैनी, प्रो. तिलक राज, डाॅ. संगीता दहिया, डाॅ. कपिल मल्होत्रा, डाॅ. शक्ति सिंह, अर्थशास्त्र विभाग के डा. बिमला, डाॅ. जगदीप, डाॅ. किरण, वित्त अधिकारी मुकेश भट्ट, इमसॉर के डाॅ. नीटू, डाॅ. सौरभकांत, निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी, शोधार्थी, विद्यार्थी, डेलीगेट्स उपस्थित रहे।