शहर में प्रशासन सो रहा है।
अभी तक मेडिकल स्टोर पर प्रतिबंधित दवा मिलने के मामले तो सामने आते रहे हैं, लेकिन अब एक नया मामला सामने आया है।
गोहाना अड्डा स्थित दिल्ली गेट के पास वाली गली में एक पंसारी की दुकान पर दूसरी जड़ी बूटी के साथ सुपारी जैसी कथित तौर पर बेटा होने की दवा भी बेची जा रही थी।
शर्बत, मुरब्बा, जड़ी-बुटी, और आयुर्वेद की दवाइयों के बीच बेटा पैदा करने की क्षमता वाली जड़ी बुटियों से तैयार दवा। जिसका मन करे वो खरीद ले। दुकानदार यानी हकीम का दावा इन दवाओं से शर्तिया बेटा ही पैदा होगा। सीएम के आदेशों के बाद सोमवार को अफसरों की नींद टूटी। पुलिस और स्वास्थ्य महकमे ने दुकान को सील कर दिया। इतना सब होने के बाद भी आरोपी फरार हो गया। हैरत की बात यह है कि यह धंधा लंबे समय से चल रहा था, लेकिन महकमे को पता तक नहीं चला। डिप्टी सीएमओ डॉ. कुलदीप ने बताया कि महकमे की शिकायत पर पुलिस ने दुकान संचालक राजू जुनेजा के खिलाफ पीसीपीएनडीटी एक्ट के सेक्शन 3 ए के साथ ही आईपीसी की धारा 420 के तहत मामला दर्ज किया है।
आयुर्वेद की दवा बेचने वाला एक हकीम शिवलिंगी बीजों सहित अन्य बीजों को बेटा पैदा करने की शर्तिया दवा बता कर बेच रहा था। दुकान के बाहर लगे बोर्ड पर पंसारी की दुकान लिखा गया है।
बताया जाता है कि किसी ने पंसारी के यहां से पहले यह दवा खरीदी और फिर इसकी शिकायत मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से कर दी। सीएम हाउस से जिला प्रशासन को इस बारे में जानकारी दी गई।
इसके बाद स्वास्थ्य महकमे की टीम के साथ पुरानी सब्जी मंडी थाना टीम ने सोमवार देर शाम दुकान पर छापा मारा। टीम ने अन्य दवाइयों के बीच शिवलिंगी, पुत्रबीजक और जीयापोता सहित अन्य बीज भी बरामद किए, जिन्हें बेटा पैदा होने की दवा बताकर बेचा जा रहा था। यह दवा दो से ढाई हजार रुपये तक में बेची जाती थी।
स्टींग में फंसा पंसारी
महकमे ने एक अधिकारी ने बताया कि कुछ दिनों पहले एक न्यूज चैनल ने पंसारी का स्टिंग ऑपरेशन किया था। स्टिंग के बाद इस बारे में मुख्यमंत्री खट्टर को भी जानकारी दी गई थी। इसके बाद सोमवार को छापा मारा गया। जगदंबा औषधालय नाम से चल रही इस दुकान का संचालक राजू जुनेजा नाम का व्यक्ति बताया जा रहा है। छापे के दौरान वह दुकान पर मौजूद नहीं था। बताया जाता है कि वह छापे की सूचना के बाद फरार हो गया। दावा किया जा रहा है कि इसके अलावा शहर की कई और दुकानों का भी स्टिंग किया गया है। हालांकि अभी इन दुकानों के नाम सामने नहीं आए हैं।
दुकान ही ढूंढती रही टीम
अफसरों की नींद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महकमे के अधिकारियों को यह तक नहीं पता कि शहर में कितनी और कहां कहां दवाइयों की दुकानें चल रही हैं। टीम जब छापा मारने निकली तो करीब दो घंटे तक दुकान ही ढूंढती रही। जब टीम को दुकान मिली तब तक दुकानदार ताला लगाकर जा चुका था। डिप्टी सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह, एसडीसीओ राकेश दहिया, वरिष्ठ आयुर्वेद अधिकारी डॉ. हरीपाल बधवार ने दुकान सील करने का निर्णय लिया। दुकान सील कर भी दी गई। लेकिन बाद में डीसी डी. के. बेहेरा से बात की गई। डीसी बेहेरा ने नायब तहसीलदार बंसीलाल को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में टीम ने दुकान के ताले तोड़े और दवाएं जब्त की। इस पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई।