रोहतक। पंचायत ड्यूटी न करने के लिए इन दिनों उपायुक्त एवं जिला चुनाव अधिकारी को अजब-गजब बहानों की अर्जी मिल रही है। इसमें कोई टीबी का हवाला दे रहा है तो कोई अस्थमा का। कुछ नहीं तो कार्यालय में ही अधिक काम होने का हवाला दिया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है कि वह अगर सबकी पीड़ा सुने तो चुनाव ड्यूटी किससे करवाए।
चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए कर्मचारियों व अधिकारियों की मेडिकल कारण दिखा कर अर्जी देना शुरू हो गया है। जब इससे बात नहीं बन रही तो फोन तक करवाए जा रहे हैं। कुछ ने तो ईएल व सीएल तक आवेदन कर दी हैं। यही नहीं कुछ ने तो अपनी पुरानी मेडिकल रिपोर्टों को आधार बना कर चुनाव ड्यूटी कर पाने में स्वयं को असक्षम दिखाया है। चुनाव ड्यूटी लगने के बाद जिस प्रकार सरकारी स्टाफ मेडिकल कारण बता रहा है, उस हिसाब से तो अधिकांश कर्मचारी फिजिकली अनफिट हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इन अनफिट स्टाफ के जरिए प्रशासन कैसे सुचारु रूप से काम कर रहा है। हैरानी तो इस बात की भी हो रही है कि कुछ कर्मचारियों ने अपने कार्यालय से पत्र भिजवाया है कि उनके यहां काम अधिक है, इसलिए उनकी चुनाव ड्यूटी हटाई जाए। जबकि चुनाव के दिन पहले ही अवकाश है। लिपिकीय विभाग में तैनात कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाओं में आपातकालीन ड्यूटी का हवाला दे रहे हैं।
वर्जन
चुनाव ड्यूटी एक जिम्मेदारी है। सभी को इसे निष्ठापूर्वक निभाना चाहिए। किसी भी प्रकार का बहाना नहीं सुना जाएगा। अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई तय है। जिसे जो जिम्मेदारी दी गई है उसे वह निभानी होगी। अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत भी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- यशपाल, उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत