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एमबीबीएस विद्यार्थियों व निदेशक के बीच हुई बातचीत रही बेनतीजा, काउंसिलिंग रद्द

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पीजीआई रोहतक में निदेशक कार्यालय के बाहर एमबीबीएस बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में धरना देते एमबीबीए?
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रोहतक। पीजीआई में 40 लाख की बांड पॉलिसी वापस लिए जाने के लिखित आश्वासन की मांग को लेकर एमबीबीएस विद्यार्थियों को धरना-प्रदर्शन वीरवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। विद्यार्थियों ने कहा कि लिखित आश्वासन के बगैर वे धरने से नहीं उठेंगे। इस मुद्दे को लेकर पीजीआई निदेशक डॉ. एसएस लोहचब व प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच लंबी बातचीत भी हुई। यह बातचीत बेनतीजा रही। इससे पूर्व विद्यार्थी बुधवार को पूरी रात ठंड व स्मॉग के बीच खुले आसमान के तले धरने पर बैठे रहे। वीरवार रात भी उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहा। इधर, धरना-प्रदर्शन के चलते एमबीबीएस की काउंसिलिंग रद्द कर दी गई।
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वीरवार को भी एमबीबीएस विद्यार्थी विरोध पर अड़े रहे। सभी ने सरकार व बांड पॉलिसी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष प्रकट किया। विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शन को अभिभावकों ने भी सहयोग किया। उनके साथ अभिभावक भी धरने पर बैठे रहे। साथ ही विभिन्न छात्र संगठन भी उन्हें अपना समर्थन देने पहुंचे। इस बीच निदेशक ने उनके एक प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया। इसमें 15 सदस्य शामिल रहे। इस प्रतिनिधिमंडल की निदेशक से करीब पौने घंटे बातचीत हुई। यहां बांड पॉलिसी को लेकर खुल कर हुई बहस के बावजूद किसी तरह का परिणाम नहीं निकला। विद्यार्थियों ने बांड पॉलिसी वापस करने को लेकर साफ कहा कि हमें किसी तरह की पॉलिसी या एग्रीमेंट नहीं चाहिए। सरकार इसे तुरंत वापस ले। मांगें पूरी नहीं होने तक विरोध जारी रहेगा। इसके बाद विद्यार्थी प्रदर्शनकारियों के पास पहुंचे। यहां बातचीत में किसी तरह का समाधान नहीं होने की जानकारी दी। देर शाम तक विद्यार्थी धरने पर बैठे रहे।
विद्यार्थियों का कहना है कि सरकार ने बांड की राशि पहले की बजाय बाद में लेने की बात कही है। बांड वही है। उसकी राशि भी वही है। यह राशि ब्याज समेत विद्यार्थियों को लौटानी होगी। चार साल की पढ़ाई व इंटर्नशिप लगाकर करीब पांच साल तक 40 लाख रुपये का ब्याज मिलाकर यह राशि करीब 76 लाख रुपये हो जाएगी। इतनी बड़ी रकम कैसे चुकाएंगे। इस पर भी नौकरी की गारंटी नहीं है। हम पहले भी बांड पॉलिसी के खिलाफ थे। अब भी हैं। बांड पॉलिसी वापस करा कर रहेंगे। बांड वापस लिए जाने के बारे में भी लिखित रूप में आश्वासन चाहिए।
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डीन ने रद्द की काउंसिलिंग
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय ने एमबीबीएस की काउंसिलिंग रद्द कर दी है। इस संबंध में विवि के डीन एकेडमिक अफेयर्स कम एडमिशन कमेटी चेयरमैन डॉ. अशोक चौहान ने पत्र जारी किया है। इसमें प्रशासनिक कारणों से दाखिले के पहले राउंड के लिए दस्तावेजों की जांच का शेड्यूल रद्द करने की बात कही गई है। काउंसिलिंग में सरकारी व एडेड मेडिकल कॉलेज, डेंटल एजुकेशन इंस्टीट्यूट, निजी विवि के एमबीबीएस, बीडीएस कोर्स शामिल थे। जल्दी ही नया शेड्यूल विवि की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
आरडीए ने बांड पॉलिसी की निंदा की
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) भी प्रदर्शनकारी एमबीबीएस विद्यार्थियों के पक्ष में उतर आई है। एसोसिएशन ने बांड पॉलिसी की निंदा करते हुए प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के साथ खड़े होने का आश्वासन दिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. बलजीत सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि विद्यार्थियों ने बांड पॉलिसी के विरोध का फैसला लिया है। वार्षिक फीस के रूप में उनसे बड़ी रकम वसूलने का फरमान सुनाया गया है। यह अभिभावकों पर असहनीय बोझ है। साथ ही पॉलिसी में नौकरी भी सुनिश्चित नहीं की गई है। एनएमसी की गाइड लाइन का पालन नहीं किया रहा है। सरकार इसके विपरीत काम कर रही है। बांड पॉलिसी लागू करना मेहनती व मेधावी विद्यार्थियों के साथ अन्याय है। ये चिकित्सा पढ़ाई से दूर हो जाएंगे। इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ेगा।
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