महम । बहलबा के 200 करोड़ की ठगी केस के आरोपियों ने ग्रामीणों के अलावा गांव की रिश्तेदारी और अन्य आस पास के गांवों से भी रकम ले रखी है। ग्रामीण महिलाओं ने गोबर के उपले बेच कर या घी बेचकर भी व्यापारी को रुपए जमा करवा रखे थे। लेनदारों में काफी लोगों की आर्थिक हालत बिल्कुल कमजोर है। व्यापारी के भागने की सूचना के बाद उनकी हालत खराब होती जा रही है। कुछ ग्रामीण अब उम्मीद लगाए हुए हैं कि अब अगर व्यापारी आ गया है तो उनकी रकम भी मिलेगी।
आरोपियों गिरफ्तारी के बाद ग्रामीण सक्रिय हो गए हैं। शनिवार को मामले में पहले से गठित ग्रामीणों की 21 सदस्यीय कमेटी ने रोहतक पहुंच कर आरोपियों से मुलाकात की। ग्रामीणों से आरोपी ने कहा कि वह तो केवल 11 लाख रुपये लेकर गया था। ये खर्च हो गए तो वापस आया हूं। ऐसे में ग्रामीणों को शक है कि आरोपी परिवार ने दूसरी जगह प्रॉपर्टी खरीदी है, जिसका पुलिस पता लगाए।
ग्रामीण काला बहलबा, सरपंच प्रतिनिधि भीम सिंह पहलवान, सरपंच सतपाल अहलावत, पूर्व सरपंच मनोज अहलावत, अनिल , जस्से पहलवान, कविंद्र, समेर सिंह, बेदपाल राठी, अजीत राठी व सुरेश मास्टर ने बताया कि आरोपी से उन्होंने अपना व्यापार दोबारा से गांव में करने की सलाह देते हुए कहा है। इस मामले में अगर वह गांव का सहयोग करे तो गांव के लोग भी उसे सहयोग करने को तैयार हैं। गांव वाले चाहते हैं कि व्यापारी के पास जो भी प्रॉपर्टी है उसे बेच कर या जो लेनदारी है वह लेकर ग्रामीणों के पैसे लौटाने की प्रक्रिया शुरू करे। ग्रामीणों को आशंका है कि व्यापारी गांव से मोटी रकम लेकर गया है तथा उसने कहीं पर बड़ी प्रॉपर्टी खरीद ली है या कहीं पर निवेश किया है। लेकिन आरोपी व उसके दोनों बेटों ने कहा है कि वे सिर्फ 11 लाख रुपए लेकर निकले थे। वे खर्च हो चुके हैं। बताया कि वे सभी लोग निजी स्कूलों में नौकरी कर आजीविका चला रहे थे। अब उनके पास देने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन ग्रामीणों को इस पर यकीन नहीं हो रहा है।
गांव से वृंदावन की कहकर गया था
आरोपी व्यापारी ने परिवार सहित गांव से निकलने से पहले ग्रामीणों को बताया था कि वह परिवार सहित वृंदावन जाकर दर्शन करके आएगा। ग्रामीणों ने बताया कि वह पहले भी वृंदावन जाता रहा है। ग्रामीणों के अनुसार आरोपी को वृंदावन से ही गिरफ्तार किया है लेकिन पुलिस ने रोहतक से ही काबू करने की बात कही है। पुलिस के अनुसार आरोपी नागपुर में किराए पर रहते थे। वे रोहतक किसी काम से आए थे वहीं से दबोचे गए हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि परिवार के अन्य सदस्यों का भी पता लगाया जाए।
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