रोहतक। सौर ऊर्जा पैनल कंपनी की ओर से विज्ञापन में किए गए दावे पर खरा नहीं उतरा। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कंपनी को 40 हजार रुपये मुआवजा, 5 हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न व पांच हजार कानूनी खर्च उपभोक्ता को एक माह के अंदर देने का आदेश दिया है।
सेक्टर तीन निवासी उमेद सिंह ने जनवरी 2023 में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अर्जी दाखिल की थी। बताया था कि उसने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की एक सौर ऊर्जा कंपनी के वीडियो विज्ञापन से प्रभावित होकर जींद बाईपास स्थित कंपनी के डीलर से 1 लाख 37 हजार 760 रुपये में एक किलोवाट का सौर पैनल खरीदा था। विज्ञापन में दावा किया गया था कि पैनल हर रोज 6 यूनिट बिजली पैदा करेगा। जबकि पैनल ने 3.85 यूनिट प्रतिदिन बिजली पैदा की। एक तरह से 28 अप्रैल 2022 से 1 नवंबर 2022 तक पैनल को 2450 यूनिट बिजली पैदा करनी थी, लेकिन 1360 यूनिट कम बिजली पैदा की गई। इससे साफ है कि विज्ञापन में जो दावा किया गया था, वह गलत था। ऐसे में 2 लाख रुपये कंपनी से मुआवजा उपभोक्ता को दिलवाया जाए। आयोग ने डीलर व कंपनी को नोटिस भेजा। डीलर ने कहा कि उसने कोई दावा नहीं किया। केवल कंपनी का उत्पाद आगे उपभोक्ता को बेचा है।
बुलंदशहर स्थित कंपनी के मालिक से मांगा गया जवाब
आयोग ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर स्थित कंपनी के मालिक से मांगा गया। जवाब दिया गया कि उसने उपभोक्ता को कोई गारंटी नहीं दी। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता के पास इस बात का भी कोई प्रमाण नहीं है कि सोलर यूनिट द्वारा कम उत्पादन किया गया। साथ ही उत्पादन मौसम व तापमान पर निर्भर करता है। आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अब फैसला दिया है। आयोग के चेयरमैन नगेंद्र सिंह कादियान ने फैसला दिया कि वीडियो में दावा किया गया है कि प्रतिदिन सौर पैनल 6 यूनिट बिजली पैदा करेगा। आयोग ने फैसला सुनाते हुए कंपनी पर 40 हजार रुपये मुआवाजा देने का आदेश दिया है। साथ ही 5 हजार रुपये हर्जाना व 5 हजार कानूनी खर्च के तौर पर देने की हिदायत दी है।