स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भ्रूण लिंग जांच कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मामले में झज्जर में गर्भवती महिला और उसकी बहन समेत तीन एजेंट को पकड़ा गया है। एजेंट के पास से अहम कागजात और 19 हजार रुपये मिले हैं। तीनों एजेंटों और दोनों महिलाओं को झज्जर पुलिस के हवाले कर दिया गया। झज्जर पुलिस ने इन पर मामला दर्ज कर लिया है।
सिविल सर्जन कार्यालय को गुप्त सूचना मिली थी कि डीघल निवासी सुनीता भ्रूण लिंग जांच के लिए एजेंटों से संपर्क कर रही है। इसके बाद सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ ने डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप के साथ मिलकर टीम तैयार की। योजनानुसार टीम ने बृहस्पतिवार से कार्य करना शुरू कर दिया था। शुक्रवार को डीघल निवासी सुनीता और उसकी बहन शीला निवासी आसन भ्रूण लिंग जांच करवाने के लिए निकली। इनके साथ एजेंट का काम कर रही बुपणिया गांव की प्रवेश और रोहतक के एक निजी अस्पताल की एएनएम नरेश और सोनी भी थी।
झज्जर से कुछ किलोमीटर पहले एजेंट नरेश रुक गई। महिला को भ्रूण लिंग जांच के लिए झज्जर के पुराना बस अड्डे के समीप राकेश मेडीकेयर सेंटर में ले जाया गया। वहां पर डाक्टर ने सुनीता की जांच की। जब यह लोग अस्पताल से बाहर आए तो एजेंट, सुनीता और उसकी बहन को पकड़ लिया गया। बताया जा रहा है कि सुनीता की जांच करने वाले डॉ. राकेश गर्ग हड्डी रोग के विशेषज्ञ हैं, लेकिन एजेंटों ने बताया कि उन्होंने ही सुनीता की जांच की। इसके लिए एजेंट और सुनीता का 20 हजार रुपये में सौदा तय हुआ था। एजेंट के पास से करीब 20 ओपीडी कार्ड, आईडी और प्रतिबंधित एमटीपी की दवाएं मिलीं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सुनीता और उसकी बहन शीला के साथ एजेंट प्रवेश, सोनी और नरेश को झज्जर पुलिस के हवाले कर दिया है। आरोपी डॉक्टर पर कार्रवाई के लिए शिकायत दी है। रोहतक की टीम में डॉ. संजीव, डॉ. विकास, ब्लाक आशा कोआर्डिनेटर मीनाक्षी और नेहा शामिल रहे। जबकि झज्जर की टीम में डिप्टी सीएमओ डा. राकेश डा. सरिता, ड्रग कंट्रोलर विजयराजे शामिल रहे।
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स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों पर फिर शक
स्वास्थ्य विभाग को एक बार फिर अपने विभाग के कर्मचारियों पर शक होने लगा है। क्योंकि झज्जर में छापे के दौरान पकड़ी गई एजेंट प्रवेश और स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों के बीच साठगांठ का मामला सामने आया है। डिप्टी सिविल सर्जन ने बताया कि बाहर वालों के साथ अपने कर्मचारियों पर भी नजर बनाए हुए हैं।