जन्माष्टमी आज : कान्हा के रंग में रंगने लगा शहर, मंदिरों में सजने लगी झांकियां
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जन्माष्टमी पर बाल गोपाल रत्नों से जड़ित वस्त्र पहनकर पालने में झूलेंगे तो गोपियों के घर से माखन भी चुराएंगे। बृहस्पतिवार को विशेष संयोगों में शहर के सभी मंदिरों में बांके बिहारी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जहां कान्हा के रंग में पूरा शहर रंगने लग गया है वहीं, रंग-बिरंगी लाइटों से सजे मंदिरों मेें झांकियां भी सजनी शुरू हो गईं हैं। इसी के साथ बाजारों में झूले, मोर पंख, बांसुरी, बाल गोपाल, मुकुट और वस्त्र की मांग बढ़ गई है। इस दिन कान्हा के भक्त निर्जल उपवास भी रखेंगे।
जन्माष्टमी पर्व की पूर्व संध्या पर बाजारों में भी रौनक बढ़ गई। शहर के प्रमुख बाजारों में देर शाम तक युवतियों और महिलाओं ने अपने हाथों पर मेहंदी लगवाई और खरीदारी की। इस बार भी राधा-कृष्ण मंदिरों के साथ दुर्गा भवन मंदिर में बड़ी धूमधाम से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मनाया जाएगा। बुधवार शाम से ही आगरा से आए कलाकारों ने माखनचोर की झांकियां सजानी शुरू कर दीं। यहां भक्तों की सुरक्षा को देखते हुए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही, पुलिस कर्मियों के भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। इस उपलक्ष्य में मंदिर में मेला लगाया जाएगा। शहर के अन्य मंदिरों में भी झांकियां सजनी शुरू हो गईं हैं। यहां छोटे-छोटे बच्चे कान्हा के अलग-अलग रूप में दिखाई देंगे।
52 साल बाद विशेष संयोग में मनेगा कान्हा का जन्म
ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप पाठक ने बताया कि बृहस्पतिवार को रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का योग बन रहा है। इस बार जन्मोत्सव 52 साल बाद अनूठा संयोग लेकर आ रहा है। जब माह, तिथि, वार और चंद्रमा की स्थिति वैसी ही बनी है, जैसी कृष्ण जन्म के समय थी। इससे पूरे समय अष्टमी तिथि का प्रभाव रहेगा। मध्य रात्रि भगवान के जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। इसलिए जन्माष्टमी कान्हा के जन्म के समय बनने वाले संयोगों के साथ विशेष फलदायी रहेगी। श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ के चंद्रमा की स्थिति में हुआ था। इससे पहले ऐसा योग 1958 में बना था। 52 साल बाद ऐसा संयोग दोबारा आया है।
वृंदावन और मथुरा से आए कान्हा के वस्त्र
शहर के बाजारों में खासतौर से वृंदावन और मथुरा से कान्हा के वस्त्र लाए गए हैं। जन्माष्टमी पर्व की पूर्व संध्या पर कान्हा के वस्त्र की खूब बिक्री हुई है। शिवाजी कॉलोनी स्थित दुकान की संचालिका अनू कपूर ने बताया कि कान्हा के साधारण कपड़े 25 से 150 रुपये में तो स्टोन वाले कपड़े 200 से 800 रुपये बेचे जा रहे हैं। साधारण मोर पंख 10 रुपये, मोर पंख लगा मुकुट 10 से 500 रुपये में बिक रहा है। लकड़ी, मेटल, गोल्डन और स्टील का पालना 130 से 1200 रुपये में बिक रहा है।