भाली आनंदपुर के राजकीय विद्यालय में बच्चों को पढ़ाती गांव की महिला।
- फोटो : अनुराग श्रीवास्तव
पहले किताबें समय पर नहीं पहुंचीं, अब शिक्षक नहीं
मेरे दो बच्चे राजकीय स्कूल में पढ़ रहे हैं। अप्रैल में बच्चों के दाखिले करवाए थे। दाखिले के तीन महीने बाद जुलाई में बच्चों को किताबें दी गई। अब स्कूल में शिक्षक ही नहीं हैं। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। - सुनील, अभिभावक
अर्थशास्त्र विषय के बच्चे कहां पढे़ंगे
मेरी भतीजी राजकीय स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ती है। अर्थशास्त्र में रुचि होने की वजह से उसने इसे मुख्य विषय चुना है। शैक्षणिक सत्र के बीच में स्कूल से यह पद खत्म कर दिया। विकल्प के तौर पर विषय बदलने के लिए कहा गया है। विभाग के फैसले का बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर पड़ेगा। - अशोक, अभिभावक
पद दोबारा जारी नहीं किया तो करेंगे विरोध
राजकीय विद्यालय में गांव के करीब चार सौ बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षकों के पद खत्म कर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। खत्म किए हुए पदों को दोबारा जारी नहीं किया गया तो ग्रामीण सामूहिक तौर पर विरोध करेंगे। - सुरेंद्र, ग्रामीण
पहले स्कूल में कुल 19 शिक्षक कार्यरत थे। अर्थशास्त्र पीजीटी का पद खत्म किया गया है। पांच अन्य शिक्षकों के तबादले किए गए हैं। गुरुवार को नए शिक्षकों ने स्कूल में ज्वाइनिंग दी है। जल्द ही स्कूल में पठन-पाठन सुचारु होगा। - अनिल कुमार, प्राचार्य, जीएसएसएस, भाली आनंदपुर
स्थानांतरित पदों पर गुरुवार से नए शिक्षकों को पदभार संभालना है। पद खत्म होने के मामले में स्कूलों में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। जल्द ही सभी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है। - विरेंद्र मलिक, जिला शिक्षा अधिकारी