रोहतक। संघर्ष ऐसी स्थिति है जो जीवन में निखार लाता है। इसकी बानगी रोहतक के लाढ़ौत गांव निवासी कमला देवी पेश कर रहीं हैं। 26 साल पहले एक सड़क हादसे में उनके पति दफे सिंह की मौत हो गई थी लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने खूब संघर्ष किया, दूध बेचकर बच्चों को पढ़ाया और अब बागवानी से लाखों कमा रहीं हैं।
दरअसल, कमला ने खेती के साथ-साथ पशुपालन भी किया। दो साल पहले एक एकड़ में अमरूद का बाग लगाया। प्रगतिशील किसान कमला अब अमरूद की खेती कर दो से चार लाख प्रति वर्ष की आमदनी कर रहीं हैं।
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लाढ़ौत गांव में तीन एकड़ में खेती करने वाली कमला के पति दफे सिंह की वर्ष 1999 में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इस हादसे ने उनके जीवन को संघर्षशील बना दिया। इस समय बेटा संदीप 16 साल, बेटी पूनम 11 साल व बेटा हकीकत चार साल के थे। तीनों बच्चों के पालन पोषण की पहले से अधिक जिम्मेदारी उन पर आ गई थी।
उन्होंने हादसे के बाद किसी तरह खुद को संभाला और खेती करने लगीं। उस समय तीन भैंसों का दूध बेचकर बच्चाें की परवरिश की। खुद खेतों में जाती बिजाई, निराई के अलावा कटाई भी करती रहीं। बागवानी विभाग की ओर से पावर विडर मशीन सब्सिडी पर ली है। अब उन्होंने दो एकड़ में गेहूं की फसल लगाई हुई है। एक एकड़ में दो साल पहले लगाए बाग में हिसार सफेदा किस्म के अमरूद का उत्पादन कर रही हैं।