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पीजीआईएमएस प्रशासन को सीनियर डॉक्टर के खिलाफ पांच माह पहले दी थी पीड़ित ने सोशल मीडिया पर अश्लील फोटो भेजने की शिकायत, पहले पुलिस ने गिरफ्तार किया तब की निलंबन की कार्रवाई

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रोहतक। पीजीआईएमएस प्रशासन ने एक महिला डॉक्टर की शिकायत के पांच माह तक आरोपी सीनियर डॉक्टर पर कार्रवाई नहीं की। अधिकारियों ने सेक्सुअल ह्रासमेंट कमेटी गठित कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। इस दौरान सीनियर डॉक्टर ने गलती मानना तो दूर जूनियर डॉक्टर को फेल करने की धमकी दी। पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि सीनियर डॉक्टर पहले अनुचित समय पर फोन करते रहते थे। 19 सितंबर को जब उसने फोन नहीं उठाया तो उन्होंने सभी मर्यादाओं को ताक पर रख कर अश्लील फोटो भेज दिए । सीनियर डॉक्टर पर कार्रवाई न होने से पर पीड़ित महिला डॉक्टर ने पुलिस थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई।
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संस्थान की एक महिला डॉक्टर ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके सीनियर डॉक्टर वीके ढुल अकसर अनुचित समय पर उसे फोन करके परेशान करते रहते हैं। 19 सितंबर को जब उसने सीनियर डॉक्टर का फोन नहीं उठाया तो उसे रात 8:51 से 8:54 के बीच अश्लील फोटो भेज दिए। इसकी शिकायत पीड़ित ने 20 सितंबर को पीजीआईएमएस के निदेशक को दी। निदेशक ने शिकायत के आधार पर सीनियर महिला डॉक्टर के नेतृत्व में जांच टीम गठित की। पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि जांच कमेटी की रिपोर्ट जमा होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा मुझे धमकाया जाता था कि देखता हूं यह परीक्षा में कैसे पास होती है। इसकी हिम्मत कैसे हुई, मेरी शिकायत करने की। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी सीनियर डॉक्टर को उसका परीक्षक न बनाया जाए और सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। सूत्रों के अनुसार डॉ. वीके ढुल ने जांच टीम के समक्ष अपना पक्ष रखा था कि उनके मोबाइल से किसी अन्य ने फोटो भेज दिया होगा, यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। इस पर सवाल उठाया गया है कि ओपीडी के समय तो संभव है कि कोई उनके फोन से छेड़खानी कर सकता है, लेकिन रात के समय उनके फोन पर कोई कैसे छेड़खानी कर सकता है।
26 दिसंबर को जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भी क्यों नहीं हुई कार्रवाई
सेक्सुअल ह्रासमेंट कमेटी की जांच रिपोर्ट प्रशासन को 26 दिसंबर को मिल गई थी, इसके बावजूद आरोपी डॉ. वीके ढुल पर कार्रवाई नहीं की गई। ऐेसे में सवाल उठता है कि प्रशासन क्यों आरोपी डॉक्टर को बचाने का प्रयास कर रहा था। जांच कमेटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई न होने पर महिला डॉक्टर ने सवा माह बाद 12 फरवरी को अपनी शिकायत थाने में दी तो 15 फरवरी को पुलिस ने डॉक्टर को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इसके बाद मंगलवार को अधिकारियों ने सीनियर डॉक्टर को निलंबित किया और बुधवार को आपात एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक बुलाकर सीनियर डॉक्टर के निलंबन पर अंतिम मुहर लगा दी।
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न्याय दिलाने के लिए होती है या मामला ठंडा होेने तक इंतजार करने के लिए कमेटी
शिक्षण संस्थानों में गठित होने वाली सेक्सुअल ह्रासमेंट कमेटी की जांच प्रणाली हमेशा सवालों में रहती है, क्योंकि कमेटी की जांच रिपोर्ट अव्वल तो समय पर नहीं आती। यदि आ भी जाती है तो उस पर कार्रवाई नहीं होती। ऐसे में पीड़ित सवाल उठाते हैं कि कमेटी का गठन पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए होता है या मामला ठंडा होने तक इंतजार करने का। पीजीआईएमएस की ही बात करें तो संस्थान में ही कुछ मामलों में गठित कमेटी की जांच रिपोर्टों का अता - पता नहीं है। शिकायतकर्ता अपनी डिग्री पूरी करके जा चुके होते हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं होती।
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