नेपाली युवती से गैंगरेप और दरिंदगी से हत्या के बहुचर्चित मामले में
रोहतक कोर्ट ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मामले में सभी सातों
बालिग आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र
न्यायाधीश सीमा सिंहल की अदालत ने दोषियों को चालान में शामिल आईपीसी की
विभिन्न धाराओं के तहत अलग-अलग सजा सुनाई।
मामले के आठवें नाबालिग नेपाली
मूल के आरोपी का केस जुवेनाइल कोर्ट में चल रहा है, जबकि नौंवे आरोपी ने
पकड़े जाने से पहले ही दिल्ली में खुदकुशी कर ली थी। बता दें कि रोहतक
कोर्ट के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि जब किसी मामले में सातों
आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो।
इससे पहले, सोमवार सुबह सातों
दोषियों को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया। एसपी शशांक
आनंद से लेकर पुलिस विभाग के अन्य उच्च अधिकारी सुबह से लेकर शाम तक कोर्ट
में डटे रहे। सुबह 11:21 बजे से दोपहर 12:13 बजे तक कोर्ट में दोषियों की
सजा पर बहस हुई। शाम 4:50 बजे कोर्ट ने गुनहगारों के लिए सजा-ए-मौत का ऐलान
कर दिया।
सजा सुनाने के बाद सातोें दोषियों को सुनारिया जेल भेज दिया
गया। यहां सभी को जिला जेल की सुरक्षित बैरक में रखा गया है। इस वार्ड में
पहले से ही करीब 40 कैदियों को रखा गया है।
आईजी, एसपी सहित कोर्ट ने की जांच एजेंसी की सराहना
कोर्ट
ने फैसला सुनाने के बाद मामले में बेहतर पुलिस जांच के लिए आईजी श्रीकांत
जाधव, एसपी शशांक आनंद, डीएसपी अमित भाटिया, फोरेंसिंक एक्सपर्ट सरोज
दहिया, नायब कोर्ट बिजेंद्र सिंह, एसआईटी में शामिल रहे एसआई एमआई खान,
पीएसआई राकेश, कुलदीप, सुभाष, गजेंद्र, सुरेंद्र सहित अन्य की सराहना की।
इसके अलावा सरकारी वकील सुरेंद्र पाहवा, पीड़ित पक्ष के वकील प्रदीप मलिक
सहित आरोपी पक्ष के वकीलों का भी आभार जताया।
इन दोषियों को सुनाई सजा-
कोर्ट
ने गद्दी खेड़ी गांव निवासी पवन, प्रमोद उर्फ पदम, सरवर उर्फ बिल्लू,
मनबीर उर्फ मन्नी, सुनील उर्फ मिढ़ा, सुनील उर्फ शीला और राजेश उर्फ घुचडू
को सजा सुनाई।
धारा सजा जुर्माना
302-
120 बी (हत्या) (साजिश में शामिल) फांसी 50 हजार
रुपये (जुर्माना न भरने पर दो महीने की अतिरिक्त कैद) सभी दोषियों को
376डी-
120 बी (गैंगरेप) (साजिश में शामिल) आजीवन कारावास 50 हजार रुपये
जुमार्ना (जुर्माना न भरने पर दो महीने की अतिरिक्त कैद) सभी दोषियों को
366-
120 बी (अपहरण) (साजिश में शामिल) दस साल की कैद 20 हजार रुपये
जुर्माना (जुर्माना न भरने पर दो महीने की अतिरिक्त कैद) सभी दोषियों को
201-
120 बी (सबूत खुर्द-बुर्द करना) (साजिश में शामिल) 7 साल कैद 20 हजार
रुपये जुर्माना (जुर्माना न भरने पर दो महीने की अतिरिक्त कैद) सभी
दोषियों को
इसके अलावा कोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 (अप्राकृतिक यौन
संबंध) में दोषी राजेश उर्फ घूचडु को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये
जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर दोषी को दो महीने की अतिरिक्त
कैद भुगतनी होगी। बता दें कि पुलिस चालान में शामिल अन्य धाराओं के अलावा
कोर्ट ने राजेश उर्फ घुचडू को आईपीसी की धारा 377 में दोषी करार दिया था।
कोर्ट की टिप्पणी-
लोग
महिला को कमजोर समझते हैं। मैं इंसान होने के साथ एक महिला भी हूं। महिला
होने के नाते उनका दर्द समझती हूं। मुझे न्यायिक अधिकारी होने के नाते
जिम्मेदारी मिली है। मैं महिलाओं की रोने और चिल्लाने की आवाज सुन सकती
हूं। जिन पर जुर्म ढाए गए।
आज हमारी सभ्यता तो आगे बढ़ गई है। लेकिन हम
दिमागी रूप से आज भी बहुत पीछे हैं। देश में लैंगिक पूर्वाग्रह है। थोड़ा
नहीं बहुत ज्यादा। कुछ पुरुष समझते हैं दुष्कर्म और जघन्य जुर्म करके
महिलाओं को दबाया जा सकता है। अदालत समाज में एक संदेश देना चाहती है कि
महिलाएं कमजोर नहीं हैं। आज महिलाएं दबने और झुकने से साफ इनकार करती हैं।
वह दामिनी या निर्भया बनने से इनकार करती है। उन्हें अपनी पहचान और निजता
पर अभिमान है। वह किसी भी कीमत पर इसे छोड़ने को तैयार नहीं है। शर्मिंदगी
तो उन पुरुषों और उनके साथियों को करनी चाहिए जो ऐसा घिनौना कृत्य करते
हैं। जैसा पीड़िता के साथ हुआ। ऐसे कृत्य से महिला के शरीर ही नहीं बल्कि
आत्मा पर भी घाव होते हैं। कोर्ट पीड़िता के शरीर के घाव तो नहीं भर सकती,
लेकिन फैसले से उसकी आत्मा के घाव मिटाने का प्रयास किया गया है। साथ ही यह
बताने की कोशिश की है कि आज महिलाएं बेबस नहीं हैं।
भविष्य में भी ऐसे
जुर्म के दोषियों से अदालत सख्ती से निपटेगी। यह घटना समाज के लिए शर्मनाक
है। अपने इस फैसले से मैंने समाज में एक संदेश देने का प्रयास किया है।
मैंने अपने कैरियर में पहली बार फांसी की सजा सुनाई है। इतना कहते ही
उन्होंने कलम तोड़ दी और वकीलों और पुलिस अधिकारियों से भरे कोर्ट रूम में
सन्नाटा छा गया।
यह सिर्फ एक फैसला, न्याय नहीं- आरोपी पक्ष के वकील
मैं
माननीय कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं। मगर यह कोर्ट द्वारा सिर्फ
फैसला दिया गया है। यह न्याय नहीं है। कोर्ट ने सभी दोषियों को एक तराजू
में रखकर सजा सुनाई है।
जैसे पीड़ित पक्ष को न्याय पाने का अधिकार है वैसे
ही आरोपी पक्ष को भी न्याय पाने का पूरा अधिकार है। हम जल्दी कोर्ट के
फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
डॉ दीपक भारद्वाज - दोषी पवन और राजेश उर्फ घुचडू के वकील।
कोर्ट ने हमारी दलील सुनकर दिया ऐतिहासिक फैसला- सरकारी वक ील
आज
कोर्ट ने हमारी दलील सुनने के बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस फैसले से
समाज में एक संदेश जाएगा। अब आरोपी किसी के साथ ऐसा घिनौना अपराध करने से
पहले न्यायालय के फै सले के बारे में सोचेंगे। हमने अदालत से सजा पर बहस के
दौरान सभी दोषियों को मौत की सजा सुनाने की अपील की थी। ताकि पीड़ित
परिवार को न्याय मिल सके।
सुरेंद्र पाहवा पीड़ित पक्ष की ओर से सरकारी वकील।
पीड़ित पक्ष के वकील बोले
हमने
दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी। यह जघन्यतम मामला है। अदालत ने
हमारी मांग को माना और सभी को फांसी की सजा सुनाई गई है। यह फैसला ऐतिहासिक
है। अदालत ने किसी भी दोषी को कोई रियायत नहीं दी है। इनके पास सिर्फ अपील
का ही रास्ता बचा है। एक माह में यह अपील कर सकते हैं।
प्रदीप मलिक, पीड़ित पक्ष के वकील।
देश का पहला मामला
सरकारी
वकील सुरेंद्र पाहवा की मानें तो रोहतक कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला पूरे देश
के नजीर है। आज तक देश के किसी भी कोर्ट ने हत्या और गैंगरेप के सात
दोषियों को एक साथ कभी भी फांसी की सजा नहीं सुनाई है।
इतना ही नहीं आज से
पहले रोहतक की किसी भी कोर्ट ने किसी एक मामले में सात आरोपियों को सजा
नहीं सुनाई है। जघन्य मामलों में यह फैसला देश के इतिहास में नाजिर होगा।