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सात फर्मों ने 1500 करोड़ रुपये का नकली लेनदेन दिखा की 5.5 करोड़ की जीएसटी चोरी

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गिफ्ट वाउचर के नाम पर हिसार व फतेहाबाद की सात फर्मों द्वारा बोगस लेन-देन कर लगभग करोड़ों 5.5 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी करने का मामला सामने आया है। विभाग को इस बात का पता तब चला जब एक फर्म की ओर से जीएसटी रिफंड दाखिल की गई। जब उसकी जांच की गई तो उसमें लॉकडाउन के दौरान 20 प्रतिशत कारोबार का जिक्त्रस् किया हुआ था।
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विभाग की ओर से जब छानबीन की गई तो पता चला कि गिफ्ट वाउचर के नाम पर पूरा खेल खेला गया। इस पूरे खेल में 8 से 10 माह के भीतर करीब 1500 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन की गई।
अधिकारी के अनुसार गिफ्ट वाउचरों पर 0.2 से 2 फीसदी की छूट दी जा रही है। ऐसे में पीओएस मशीनों पर अंकित मूल्य पर कार्ड स्वाइप किया गया और उस पर मिलने वाली छूट को आपस में बांट लिया गया। जांच में यह मिला की जो छूट दी गई थी उनको इन्होंने आपस में बांट लिया और कार्ड को स्वाइप करते समय इन्होंने लेनदेन का कोई बिल नहीं बनाया। खास बात यह रही की लॉकडाउन की अवधि के दौरान दोपहिया वाहनों और कारों में पेट्रोल-डीजल की भारी बिक्त्रस्ी दिखाई गई। जबकि उस अवधि के दौरान ज्यादातर गतिविधियां बंद थी। अधिकारी ने बताया कि भुगतान एव समाधान सिस्टम अधिनियम 2007 एव आरबीआई द्वारा जारी मुख्य दिशा-निर्देशों का उल्लंघन होना पाया गया। अधिकारियों को जांच में यह भी मिला की इनमें अनिवार्य केवाईसी का भी पालन नहीं किया गया।
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क्या हैं गिफ्ट वाउचर
विभाग की भाषा में पीपीआई (सेमी क्लोजड प्रीपेड इंस्ट्यूमेंट) जिसे सामान्य भाषा में गिफ्ट कार्ड्स कहते हैं। यह बैंकों के द्वारा या फिर विभाग द्वारा ऑनलाइन लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए आम लोगों को छूट दी जाती है। इसी छूट का दुरुपयोग करते फर्मों ने इसका फायदा उठाने की कोशिश की।
जांच में मिली कई नकली फर्में
पीपीआई से विभिन्न लोगों द्वारा छूट या कमीशन लेना दिखाया गया। यह सब आर्थिक गतिविधियों के अंतर्गत आता है। इस लेनदेन पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है। जब विभाग ने जांच की तो ऐसी कई नकली फर्में मिली जिनका अस्तित्व ही नहीं था और इन फर्मों के द्वारा भारी लेनदेन किया गया था। इन नकली फर्मों द्वारा फर्जी क्रेडिट करके निर्यात पर फर्जी रिफंड लिया गया।
डीलरों से भरवाए एक करोड़
अधिकारी ने बताया कि इन डीलरों से अभी तक एक करोड़ रुपये से ज्यादा का जीएसटी वसूल किया जा चुका है। अभी आगे की जांच जारी है। हिसार व फतेहाबाद की सात फर्मों के द्वारा जो 1500 करोड़ रुपये का करीब ट्रांजेक्शन हुआ है। जिस पर करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी बनती है।
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-विजय मोहन जैन, आयुक्त, सीजीएसटी रोहतक।
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