25 रूप नगर में हुए वैदिक संस्कृति धर्मार्थ रक्षा न्यास के चौथे वार्षिक उत्सव में यज्ञ करते आयोज
रोहतक। वैदिक संस्कृति धर्मार्थ रक्षा न्यास के चौथे वार्षिक उत्सव के अंतिम दिन रविवार को आर्य समाज रूप नगर के प्रांगण में वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ किया गया। पानीपत से आचार्य संजीव वेदालंकार ने बताया कि यज्ञ संसार के सर्वोत्तम कार्यों में से एक है।
सहारनपुर से आए पंडित प्रताप वैदिक ने भजनों के माध्यम से सुंदर संदेश दिया। उन्होंने बताया कि जीवित माता-पिता की सेवा ही सच्ची पूजा है। यदि जीवित माता पिता की सेवा संतान न करें तो पाप मिलता है।
वो संतानें बड़ी भाग्यशाली हैं जिनको जीवित माता पिता का आशीर्वाद मिलता है। यज्ञ की पूर्ण आहुति सांय को आचार्य शक्तिदेव व ब्रह्मचारी तरुण ने कराई। कार्यक्रम में ब्रह्मचारी सत्यकाम, देशराज आर्य, बलदेव खुराना, संजय कथूरिया, उदय सिंह आर्य, सुभाष , रोहतास, आयुष, सौरभ, राहुल, कमलेश, कीर्ति, प्रीति आदि शामिल रहे।