कोरोना का संक्रमण लगातार जिले में फैल रहा है। सोमवार पूर्व स्वास्थ्य मंत्री करतारी देवी के भतीजे, जिला अस्पताल की महिला काउंसलर समेत 15 नए संक्रमित मरीज मिले हैं। वहीं कैंसर पीड़ित संक्रमित महिला ने अपने घर पर दम तोड़ा। स्वास्थ्य विभाग की टीम संक्रमितों की कांटेक्ट हिस्ट्री तलाशने में जुटी है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन में सोमवार को जिले में 174 कोरोना संक्रमितों की की पुष्टि की गई है। इसमें से जिले में अब 141 पॉजिटिव केस हैं। इसमें से 50 को विभाग ने सरकार की गाइडलाइन के अनुसार होम आइसोलेट किया है। विभाग के अनुसार पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के भतीजे को सांस की समस्या है। उसका गुरुग्राम में रियल एस्टेट का बिजनेस है।बताया जा रहा है कि उन्होंने शहर के निजी अस्पताल में भी अपना उपचार कराया, लेकिन आराम नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें पीजीआईएमएस में दाखिल कराया गया है। वहीं जिला अस्पताल की महिला काउंसलर अपनी संक्रमित बहन के कांटेक्ट में आई थी।
इन एरिया में मिले संक्रमित मरीज
सूर्या नगर, विशाल नगर, कमला नगर, गांधी नगर, सेक्टर-दो, सनसिटी, मालगोदाम रोड, हाउसिंग बोर्ड, करौंथा, शिवम एनक्लेव, चमारिया, न्यू पंजाबी कॉलोनी सांपला
जिला अस्पताल में मचा हड़कंप, आज होगी सभी की जांच
जिला अस्पताल में महिला काउंसलर के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर हड़कंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि महिला काउंसलर छह स्टाफ के साथ एक कमरे में बैठती थी। बताया जा रहा है कि काउंसलर की बहन कोरोना पॉजिटिव मिली लेकिन उसे क्वारंटीन नहीं किया गया। अब स्वयं काउंसलर के पॉजिटिव आने से अन्य लोगों के संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं, कस्बे के भैसरू कलां गांव की एक युवती दिल्ली में डीसी रेट पर नौकरी करती है, उसे 6 जून को हल्का बुखार, खांसी हुई तो उसने सांपला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराई। सोमवार को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। वहीं, रेलवे रोड स्थित कॉलोनी निवासी 32 वर्षीय युवक भी संक्रमण की चपेट में आ गया है। बताया जा रहा है कि युवक गुरुग्राम में नौकरी करता है और दिल्ली में मार्केटिंग के लिए जाता था। उसने सिविल अस्पताल रोहतक में जांच कराई थी।
दाह संस्कार के बाद पता चला कैंसर पीड़ित महिला संक्रमित है
- परिजनों का दावा दिल्ली में मिली थी निगेटिव रिपोर्ट, रोहतक जांच में मिली पॉजिटिव
रोहतक। कोरोना के संक्रमणकाल में जिले में सोमवार को दूसरे संक्रमित मरीज की मौत हो गई। सबसे बड़ी आफत यह है कि मरीज के संक्रमित होने का पता तब चला जब मरीज का दाह संस्कार भी कर दिया गया। महिला का एक जून से शहर के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। रविवार को निजी अस्पताल ने महिला को लामा (लीगल अगेंस्ट मेडिकल एडवाइज) कर दिया। इसके बाद महिला के परिजनों ने उसकी कोरोना जांच कराने के लिए सैंपल दिया और घर चले गए। रात को महिला की तबीयत बिगड़ी और उसने दम तोड़ दिया। संक्रमण से बेखबर परिजनों ने बगैर सुरक्षा इंतजाम के उसका अंतिम संस्कार कर दिया। सोमवार को पीजीआई से सूचना मिली कि वह संक्रमित है। अब स्वास्थ्य विभाग के लिए निजी अस्पताल से लेकर पीजीआईएमएस और उसके परिजनों की कांटेक्ट हिस्ट्री तलाशना चुनौती है।
झज्जर चुंगी के समीप रहने वाली 68 वर्षीय मृतका की बेटी ने बताया कि उसकी मां कैंसर पीड़ित थी और दिल्ली में उपचार चल रहा था। दिल्ली में उपचार के दौरान कोरोना जांच करवाई थी, इसमें रिपोर्ट निगेटिव मिली थी। एक जून को उन्होंने अपनी मां को निजी अस्पताल में दाखिल कराया, जहां करीब सात दिन उपचार चला। आरोप है कि रविवार को निजी अस्पताल ने उन्हें कोरोना जांच करवाने के लिए पीजीआईएमएस भेज दिया और कहा कि सैंपल करवाकर घर चले जाएं। इसके बाद उन्होंने पीजीआई में मां का सैंपल दिया और घर चले गए। रात को तबीयत अधिक बिगड़ी और मरीज ने दम तोड़ दिया। मरीज के साथ उसके परिवार के तीन लोग लगातार संपर्क में रहे। वहीं स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिलते ही उन्होंने नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी।
सफाई कर्मचारी की हुई थी पहली मौत
जिले में पहली कोरोना मरीज की मौत गोहाना अड्डा के रहने वाले नगर निगम के एक ठेके के सफाई कर्मी की हुई थी। यह मरीज भी डायलिसिस पर चल रहा था। हालांकि इससे पहले साईंदास कॉलोनी की महिला की भी कोरोना संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है। लेकिन महिला कैंसर के उपचार के लिए लंबे समय से दिल्ली में ही रही थी और उसका अंतिम संस्कार भी दिल्ली में ही हुआ।
निजी अस्पताल होगा बंद, सबकी होगी सैंपलिंग
सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला ने बताया कि निजी अस्पताल के जिस एरिया में मरीज दाखिल थी, उसको सैनिटाइज कराया जाएगा। इसके अलावा वहां के स्टाफ का सैंपल भी कराया जाएगा। बाकी जांच रिपोर्ट आने के बाद तय होगा कि आगे क्या करना है। इस संबंध में जांच कराई जाएगी। प्राथमिक जानकारी में सामने आया है कि मरीज निजी अस्पताल से लामा है। पीजीआईएमएस से भी पूछा जाएगा कि उन्हें लक्षण वाले मरीज का सैंपल लेकर घर क्यों जाने दिया।