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Rohtak News: स्कूल बने बाजार, शिक्षा का हो रहा व्यापार

Sun, 06 Apr 2025 02:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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05सीटीके45 राजेंद्र तौमर, कैलाश कॉलोनी।
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रोहतक। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों की परेशानियां बढ़नी शुरू हो गई हैं। इसमें सबसे बड़ी समस्या विद्यार्थियों की पुस्तकें व वर्दी हैं। इन जरूरतों को लेकर निजी स्कूलों में अभिभावकों को जमकर लूटा जा रहा है। प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों की किताबें ही ढाई से पांच हजार रुपये तक में आ रही हैं।
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इसके अलावा, वर्दी खर्च भी 1500 से दो हजार रुपये से कम नहीं है। निजी स्कूल संचालक मनमर्जी चला रहे हैं। यही वजह है कि स्कूल परिसरों में ही किताबें व वर्दी धड़ल्ले से बिक रही हैं। यहीं नहीं, अनेक स्कूलों ने दुकानें चिह्नित की हुई हैं। उनके स्कूल की लोगो युक्त वर्दी वहीं मिलेगी। इनके कपड़े की गुणवत्ता भी निम्न स्तर की है।
निजी विद्यालयों में अधिकतम शुल्क व महंगी पुस्तकें खरीदना अभिभावकों के लिए संकट बना हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि ड्रेस भी लोगो लगाकर दी जा रही है। लोगो युक्त ड्रेस स्कूल परिसर के अंदर भी बेची जा रही हैं। कुछ स्कूलों की दुकान विशेष पर ही वर्दी उपलब्ध है। अगर फीस न भरें तो बच्चों को दाखिल करवाना मुश्किल हो रहा।
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अभिभावकों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट चार्ज भी हर साल बढ़ाते हैं। आठवीं कक्षा तक बच्चों का पाठ्यक्रम प्रत्येक वर्ष बदला जाता है। नई-नई और महंगी पुस्तकें खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर किया जा रहा है, जिससे गरीब अभिभावक परेशान हैं। उन्होंने बताया कि स्कूलों में करीब 4 साल में 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी हुई है। अगर अभिभावक कुछ फीस माफ करा लेते हैं तो उन पर भी किसी न किसी प्रकार का अन्य चार्ज लगाया जा रहा है।
निजी स्कूलों में वर्दी व किताबें नहीं बेची जा सकती। यदि कोई ऐसा करता है तो गलत है। विभाग इस तरह के मामलों पर नजर बनाए हुए है। इसके लिए टीम गठित की गई है। यह टीम लगातार स्कूलों में जांच भी कर रही है। कहीं गड़बड़ी मिलती है तो नोटिस देकर कार्रवाई भी की जाएगी।
- मनजीत मलिक, जिला शिक्षा अधिकारी।
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विद्यालयों में शिक्षा निशुल्क होनी चाहिए। कभी ड्रेस, कभी इवेंट चार्ज तो कभी विभिन्न प्रकार के चार्ज अभिभावकों से वसूले जा रहे हैं। एनसीईआरटी की कम, अन्य महंगी किताबों को प्राथमिकता दी जाती है। सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अभिभावकों के हित में निजी स्कूलों की बाजारवाद नीति को बंद करना चाहिए।
- यशवंत, राज्य प्रधान, अभिभावक संघ-ए वेलफेयर सोसाइटी।
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अभिभावकों पर निजी स्कूलों की फीस का बोझ बढ़ रहा है। स्कूलों में किताबों की बिक्री की जा रही है। स्कूल प्रबंधक भी दुकानों के नाम अभिभावकों को बता रहे हैं कि इस दुकान से पुस्तक खरीदें। 4 साल में करीब 10 प्रतिशत से अधिक की फीस और अन्य पाठ्यक्रम सामग्री में बढ़ोतरी हुई है। अभिभावकों को भ्रमित किया जा रहा है। सरकार से अनुरोध है कि प्राइवेट स्कूलों की दुकान को बंद करवाया जाए।
- पूनम, अभिभावक।

बच्चों से टूट-फूट का भी चार्ज लिया जाता है, जबकि ऐसा कुछ होता नहीं। अभिभावकों की जेब पर अधिक शुल्क, फीस और किताबों पर पूरा असर पड़ रहा। महंगी पुस्तकें खरीदना अभिभावकों के लिए चिंता बन गई है। ज्यादातर अभिभावक इंतजार कर रहे हैं कि सरकार कुछ कार्रवाई करे और निजी स्कूलों में फीस को माफ करें।
- सीमा, जिला प्रधान, महिला अभिभावक संघ

गरीब बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। गरीब विद्यार्थी पढ़ने की उम्मीद कर सकता है, लेकिन पढ़ नहीं सकता। सरकार से अनुरोध है कि समान शिक्षा के लिए नियम बनाएं। स्कूलों में व्यापारीकरण ऐसा है कि किताबों के मामले में पाठ्यक्रम बदल देते हैं, ताकि हर साल व्यापार किया जा सके।
- राजेश डबास, अभिभावक।
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अपने पौत्र व पौत्री का दाखिला निजी स्कूल में कराया है। यहां उनकी किताबों के लिए एक दुकान का नाम लिया गया, जबकि वर्दी के लिए दूसरी दुकान का पता दिया गया है। दोनों ही चीजें लेना जरूरी हैं। यही नहीं, डायरी व अन्य चीजों का शुल्क भी वसूला गया है। किताबें कहीं हजार रुपये में मिल रही हैं तो कहीं 15 सौ रुपये में बेची जा रही हैं।
- राजेंद्र तोमर, कैलाश कॉलोनी।

05सीटीके45 राजेंद्र तौमर, कैलाश कॉलोनी।

05सीटीके45 राजेंद्र तौमर, कैलाश कॉलोनी।

05सीटीके45 राजेंद्र तौमर, कैलाश कॉलोनी।

05सीटीके45 राजेंद्र तौमर, कैलाश कॉलोनी।

05सीटीके45 राजेंद्र तौमर, कैलाश कॉलोनी।

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